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________________ २९२ बैठे. ३ एवं दो मनुष्योंके विभागमे है, एककादिल न होनेवाली नौकापर चढे. ३ साधुके निमित्त सामने लाइ हुइ नौकापर चढे.३ (७) जलमें रही हुइ नौकाको खेंचके साधुके लीये स्थलमें लावे, उस नौकापर चढे. ३ (८) एवं स्थलमें रही नौकाको जलकी अंदर साधुके निमित्त लावे, उस नौकापर चढे. ३ (९) जिस नौकाकी अन्दर पाणी भरागया हो, उस पाणीको साधु उलचे (बाहार फेंके ) ३ . (१०) कादषमें खुची हुइ नौकाको कर्दमसे निकाले. ३ (११) किसी स्थानपर पड़ी हुइ नौकाको अपने लीये मगवाके उसपर चढे. ३ (१२) उर्ध्वगामिनी नौका पाणीके सामने जानेवाली, अधोगामिनी नौका, पाणीके पुरमें जानेवाली नौकापर चढे. ३ (१३) नौकाकी एक योजनकी गतिके टाइममें आदा योनन जानेवाली नौकापर बैठे. (१४) रसी पकड नौकाको आप स्वयं चलावे. (१५) न चलती हुइ नौकाको दंडाकर, वेत्तकर, रसीकर आप स्वयं चलावे. ३ (१६ ) नौकामें आते हुवे पाणीको पात्रासे, कमंडलसे उलच बाहार फेंके. ३ (१७) नौकाके छिद्रसे आते हुवे पाणीको हाथ, पग और कोइ भी प्रकारका उपकरण करके रोके. ३ भावार्थ-प्रथम तो जहांतक रहस्ता हो, वहांतक नौकामें
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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