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________________ (४७) मस्तकके बाल, (४८) एवं कानोंके बाल. (४९) कानकी अन्दरके बाल. उक्त लंबे बालोंको । शोभा निमित्त ) कटावे, समरावे, सुन्दरता बनावे, वह मुनि प्रायश्चितका भागी होता है. मस्तक, दाढी मुच्छोके लोच समय लोच करना कल्पे. (५०),, अपने दांतोंको एकवार अथवा वारंवार घसे.३. (५१) शीतल पाणी गरम पाणीसे धोवे. ३ (५२) अलतादिके रंगसे रंगे.३ , भावार्थ-अपनी सुन्दरता-शोभा बढानेके लीये उक्त कार्य करे, करावे, करतेको सहायता देवे. (५३) ,, अपने होठोंकों मसले, घसे. ३ (५४) चांपे, दबावे. (५५) तैलादिका मालीस करे. (५६) लोद्रव आदि सुगंधि द्रव्य लगावे. (५७) शीतल पाणी गरम पाणीसे धोवे. ३ (५८) अलतादि रंगसे रंगे, रंगावे, रंगतेको सहायता देवे भावना पूर्ववत्. (५९), अपने उपरके होठोंका लंबापणा तथा होठोपर के दीर्घबालोंको काटे, समारे, सुन्दर बनावे. ३ (६०) एवं नेत्रकि भोपण काटे, समारे. ३ (६१) एवं अपने नेत्रों ( आंखों )को मसले. - (६२) मर्दन करे. (६३) तैलादिका मालीस करे.
SR No.034235
Book TitleShighra Bodh Part 21 To 25
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar
PublisherSukhsagar Gyan Pracharak Sabha
Publication Year
Total Pages419
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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