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________________ शतक 112011 ब्याक्या-‘सुरणारगेसु' ति गई बउब्विहा विश्याह 'सुरकारमेसु बचारि हाँसि 'सि देवरहगे बचारि गुणट्ठाणाणि मूलिलाणि भवन्ति, तेसु विरई पस्थि ति काउं उवरिह्नाणि ण संभवन्ति । तिरिएम जाण पंचेव' ति तिरियगईप पंचगुणद्वाणाणि मूलिलानि, तेसु सम्बधिर स्थिति फाउं उपरिल्लाणि प सम्मवन्ति । ' मणुयाईए वि तहा चोह सगुणणामघेाणि' ति मणुस्सगईप चोइसवि गुणट्ठाणाणि, कहं ? सच्चे भाषा मणुपसु सम्भवन्ति ॥ १० ॥ एवं मग्गणठाणेसु णेयस्वं महसंखित्तत्ति काउं भन्नइ इंदिप ति-पगिदियाईणि पुव्यवष्णियाणि चोइसवि जीवद्वाणाणि (तेसु) सब्वेमुषि मिच्छद्दिट्ठी लग्भद्द। बायरेगिंदिय-वितिचउभसन्निपंचिदिपसु लखीपज सगेसु करणेण अपजस गेसु, सनिपचिन्दिपसु करणपञ्चसीए पञ्जन्तगापासगेस, सासायणसम्मदिट्ठी लम्भर, लखि अपज सगेसु सव्वत्य णत्थि । सेसा सन्धेवि सत्रिपात्तगम्मि करणपजातिय पञ्जन्तगम्मि Bमन्ति, णवरि असंजयसम्मद्द्द्विी करणपात्तापजस गेसुषि उम्मन्ति ॥ कार सि- पुढविभाइ जाव तसका इमोति, मिच्छद्दिष्ठी सम्धेसु वि, बायरपुढ विभा उप संयबणस्स इकाइगेसु लखिपजतगेसु करणअपजत्तगकाले चेत्र सासणो लम्भर, तेसु उववज्जति त्ति काउं, तसेसुषि लखिए पजन्त्तगेसु करणपजतगापजत लम्भति, तसेम्पु एवं चेव अस्संजय सम्मदिट्ठीषि । सेसा सब्बे तसकायपजन्तगे करणपजत्तीए पजन्तगेसु चेव लग्भन्ति ॥ जोगो अधिकृतः ॥ वेदेत्ति-मिच्छाईट्ठीप्यभिद्द जाव भणियट्टिद्धार संखेजति भागमेतं सेसत्ति ताव तिसुवि वेप लम्भन्ति, हेट्ठीला सब्वे सवेयगा, उवरिल अवेयगा ॥ कसाय तिमिच्छद्दिट्ठीप्पभिर जाव अनियट्टिद्धार संसेजइभागमेव सेसन्ति, हेठिल्ला सन्देवि कोहमाणमायासु लम्भंति, उवरिल्ला अप्पकसारणो सब्बे । लोभंमि जाव मुडुमरागस्स चरिमसमओ त्ति ताब हेट्ठि सव्वेवि लग्भति, सेसा अकारणो ॥ णाणाणि अधिकृतानि ॥ संजमत्ति-मिच्छद्दिट्ठीप्पभिर जाव असंजयसम्मद्दिट्ठी ताव सच्चे असंजया, ॥१०॥
SR No.034183
Book TitleShatak Prakaranam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVeer Samaj
PublisherVeer Samaj
Publication Year1922
Total Pages104
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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