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दम्भलेशाऽपि मल्यादेः स्त्रीत्वानर्थनिबन्धनम् । अतस्तत्परिहाराय यतितव्यं महात्मना ॥२२॥
भावार्थ : जरा-सा दम्भ भी मल्लिनाथ आदि के लिए स्त्रीवेदरूपी अनर्थ का कारण बना, इसलिए महात्मा पुरुष को उसका त्याग करने के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए ॥२२॥
॥ इति दम्भ-त्यागाधिकारः ॥३॥
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अध्यात्मसार