________________
श्रमण सक्त
२३५
-
पंताणि चेव सेवेज्जा
सीयपिंड पुराणकुम्मास। अदु वुक्कस पुलाग वा जवणट्ठाए निसेवए मथु।।
(उत्त ८
-
१२)
भिक्षु इन्द्रिय-संयम के लिए प्रान्त (नीरस) अन्न-पान, शीत-पिण्ड, पुराने उडद, बुक्कस (सारहीन), पुलाक (रूखा) या मथु (वैर या सत्तू का चूर्ण) का सेवन करे।