SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 31
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ । २८ ) हिसाका पाप तभा लगता है जब मनुष्य खुद किसी जीवकी घात करता है या घात करनेका निमित्त या सहायक कारण होता है । अपनेसे मारे या घात किये गये जीवोंके लिये ही कोई उत्तरदायी ठहर सकता है। किसी जीवको सर्वथा सर्व प्रकारसे न मारनेका त्याग करना ही सबसे बड़ी दया है। अहिंसाको ही भगवानने पूरी दया बतलाया है। जैसे ही मनुष्य अहिंसाका व्रत अङ्गीकार करता है और उसका पूर्ण पालन करने लगता है वसे ही वह संसारके समस्त जीवोंके लिए अभय दाता हो जाता है । जीवोंको उससे किसी प्रकारके भयकी आशंका नहीं रह जाती । मन, वाणी और शरीरमें अहिंसाका पालन करना, दूसरोंसे हिंसा न कराना और हिंसा करने वालेका अनुमोदन, सहयोग न करना-यही सबसे बड़ी दया है। अभयदान सबसे बड़ी दया है। इससे बढ़कर दयाकी कल्पना नहीं की जा सकती। सब जीव सुखके लिये लालायित हैं, दुःख • सबको अप्रिय है, मृत्युसे सब कोई भय खाते हैं इसलिए जब कोई नहीं मारनेकी प्रतिज्ञा करता है तो वह जीबोंके सबसे बड़े भयको दूर करता है, अपनी ओरसे कोई भयकी आशङ्का उनके लिए नहीं रहने देता। इससे बढ़कर दयाका आदर्श और क्या होगा ? छैन मतके अनुसार सब जीव समान हैं। इनकी दृष्टिमें एकेन्द्रियसे लेकर पंचेन्द्रिय तकके जीवोंमें कोई फरक नहीं। एकके सुखके लिये दूसरे को दुःख पहुंचाना इनकी दृष्टिमें अनुचित और पाप जनक है। सुखेच्छा की दृष्टिसे सभी जीव सदृश है इसलिए पंचेन्द्रियके सुखके लिये एकेन्द्रियकी घात करना, राग द्वेषके अतिरिक्त और कुछ नहीं। इसीलिए साधु सचित्त वस्तुओंके दानका उपदेश नहीं दे सकते और न अनुमोदन ही कर सकते। जहां एक जीव दूसरे जीव पर झपट रहा हो वहां साधु निविकार चित्तसे तटस्थ रहते हैं। वे एकको डराकर दूसरेको बचानेकी चेष्टा नहीं कर सकते । बिल्ली चूहे पर झपट रही हो तो साः बिल्लीको डरा कर भगानेकी चेष्टा नहीं करेंगे न वे यह चाहेंगे कि चूहा ही मारा जाय । ऐसे अवसर पर वह ध्यानस्थ होकर निर्विकार चित्तसे बैठे रहेंगे।
SR No.032674
Book TitleJain Shwetambar Terapanthi Sampraday ka Sankshipta Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Shwetambar Terapanthi Sabha
PublisherMalva Jain Shwetambar Terapanthi Sabha
Publication Year
Total Pages50
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy