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________________ २ मिश्रबंधु-विनोद गुप्त जी संवत् १८८३ में जन्मे थे । जब इनकी उमर २७ वर्ष की हुई, तब साधु हो गए और अपना नाम 'गणेशपुरी' रक्खा, और काशी में जाके संस्कृत पढ़ी। ये भाषा में अच्छी कविता करते थे । सुनने में आता है कि 'काव्यप्रकाश' सारा ग्रंथ उनके जिह्वाग्र था। इन्हीं महाशय ने महाभारत के कर्णपर्व को भाषा में 'वीरविनोद' नाम से छपाया है। कविता में अपना नाम न रखके अपने पिता श्रीपद्मजी के नाम कविता करते थे। गणेशपुरीजी सारे राजपूताने में प्रख्यात हैं । परंतु जोधपुर और उदयपुर में विशेष रहते थे। क्योंकि जोधपुर के महाराजा जसवंतसिंह इनको बहुत मानते थे। नाम-( २०६५ ) कृपालुदत्त, काशी-वासी। कविताकाज-१९१५ । विवरण-ये महाशय महामहोपाध्याय पं० सुधाकर द्विवेदी के पिता और एक अच्छे कवि थे। नाम-(२०६६) कृष्ण । जन्मकाल-१८८ कविताकाल-१६११ । नाम-(२०६७) गयादीन कायस्थ, बाँदा । ग्रंथ-चित्रगुप्तवृत्तांत । जन्मकाल--१८६०। कविताकाल-१६१५। विवरण-फतेहपुर में तहसीलदार थे। यह ग्रंथ ज्ञानसागर प्रेस में छपा है। नाम-(२०६८ ) गोमतीदास, अवध ।
SR No.032634
Book TitleMishrabandhu Vinod Athva Hindi Sahitya ka Itihas tatha Kavi Kirtan Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGaneshbihari Mishra
PublisherGanga Pustakmala Karyalay
Publication Year1929
Total Pages420
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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