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श्रीमद्भगवद्गीता -- (१) शान्तनु = निर्विकार ब्रह्मचैतन्य । (२) गंगा=चैतन्या प्रकृति । (३) भीष्म=आभास चैतन्य ( गंगाके गर्भसे आठ पुत्र हुये, वही सब अष्ट वसु हैं; अष्टम् का नाम प्रभास= अस्मिता वा भीष्म )। (४) सत्यवती = जड़ प्रकृति। (५) वेदव्यास=भेदज्ञान ( पराशर ऋषिके शुक्रजात पुत्र) । (६) चित्रांगद = ऐश महतत्त्व। (७) विचित्रवीर्य = ऐश अहंकार। (६) अम्बालिका = निश्चय वृत्ति। (८) अम्बिका = संशय वृत्ति । (११) पाण्डु = निर्मल बुद्धि ( यह (१०) धृतराष्ट्र-मन (अन्ध )। पुरुष होकरके भी नपुसकवत् (१२) गान्धारी= प्रवृत्ति शक्ति । थे।)
(१३) वैश्या- प्रवृत्ति आसक्ति (१४) कुन्ती-निवृत्ति शक्ति । । (ग्रहण, त्याग )। (१५) माद्री = निवृत्ति आसक्ति। (१६) दुर्योधनादिकम (१८) युधिष्ठिर =आकाश-तत्त्व क्रोधादि । ( शब्द गुण)।
(१७) युयुत्सु युद्धेच्छा (इसने १६) भीम = वायुतत्त्व (शब्द ।
युद्धके प्राकालमें ससैन्य पांडव स्पर्श मुण)।
पक्षका अवलम्बन किया था)। (२०) अर्जुन =तेजस्तत्त्व (शब्द स्पर्श रूप गुण )। (२१) नकुल =रसतत्त्व (शब्द स्पर्श रूप रसगुण) (२२) सहदेव पृथ्वीतत्त्व (शब्द स्पर्श रूप रस गंध गुण) (२३) द्रौपदी-कुलकुण्डलिनी। (२४) सुभद्रा अतिशय मंगल (७ संख्याके बाद बायें किनारे शक्ति ।
अर्थात् बायें तरफके स्तम्भमें (२५) अभिमन्यु =संयम अर्थात् षांडव वंश और दाहिने तरफके धारणा-ध्यानसमाधिका एकत्र स्तम्भमें धृत्तराष्ट्रका वंश दिखाया समावेश।
गया है। ) ॥१२॥