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अवतरणिका सूक्ष्मरूपसे वर्णन करना निष्फल है; क्योंकि योग प्रानुष्ठानिक व्यापार है; पुस्तक पढ़के जो आनुमानिक ज्ञान होता है उससे कुछ फल नहीं है। अभ्यासियोंके लिये केवल इडा-पिङ्गला-सुषुम्ना नाड़ीत्रय और चक्र समूहोंके संस्थान अवगत होना विशेष प्रयोजन है इसलिये चित्रमें केवलमात्र उतना ही दिखाया गया; दूसरा कुछ नहीं। सद्गुरूपदिष्ट क्रियाके अनुष्ठानमें साधक ज्यों ज्यों अपनी साधना में उन्नति लाभ करेंगे, त्यों त्यों वह स्वयं योगके समुदय विषयको क्रमशः निजबोधज्ञानसे प्रत्यक्ष करेंगे और समझेंगे। अलम् ।
-प्रकाशक