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________________ ॐ हमारे जीवन पथदर्शक दिगम्बर जैन आचार्य भगवंतका सामान्य स्वरूप हमारे आचार्य भगवंत स्वयम्के जीवनसे यह परम सत्य बताते हैं कि ' हे जगतके जीव ! तुम्हारे सुखका एकमात्र उपाय निज परमात्मस्वरूप तत्त्वका आश्रय है। सम्यग्दर्शनसे लेकर सिद्ध तककी सर्व भूमिकाएँ उसमें समा जाती हैं; क्योंकि निज परमात्मस्वरूप तत्त्वका जघन्य आश्रय सो सम्यग्दर्शन है; वह आश्रय मध्यम कोटिकी उग्रताको धारण करने पर जीवको देशचारित्र, सकलचारित्र और पूर्ण आश्रय होने पर केवलज्ञान तथा सिद्धत्व प्राप्त करके जीव कृतार्थ होता है । इस प्रकार निज परमात्मस्वरूप तत्त्वका आश्रय ही सम्यग्दर्शन है, वह ही सम्यग्ज्ञान है और वह ही सम्यक्चारित्र है; वही सत्यार्थ प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान, आलोचना, प्रायश्चित्त, सामायिक, भक्ति, आवश्यक, समिति, गुप्ति, तप, संवर, निर्जरा, धर्म-शुक्लध्यान आदि सब कुछ है । www. જયદેવ सभी आचार्य, उपाध्याय, साधुका जीवन निम्नानुसार होता है। (१) परमसंयमी महापुरुष होनेसे त्रिकालनिरावरण निरंजन परम पंचमभावकी भावना में परिणमित होनेके कारण ही समस्त बाह्यव्यापारसे विमुक्त; (२) ज्ञान, दर्शन, चारित्र और परम तप नामकी चतुर्विध आराधनामें सदा अनुरक्त; (३) बाह्य - अभ्यंतर समस्त परिग्रहके (8)
SR No.032436
Book TitleBhagwan Mahavir Ki Acharya Parampara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Swadhyay Mandir Trust
PublisherDigambar Jain Swadhyay Mandir Trust
Publication Year2013
Total Pages242
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size35 MB
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