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तीस
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क्रमांक
परिशिष्ट-१ हेम संस्करण १. इतरी चरचा इं मौन न आवै कांई ? २. नरक पिण अजीव जासी ३. म्हातूं चरचा कांई करी ? ४. कांई जाण ने बतायो ? ५. हेमजी चरचा करसो ? ६. दूजी चरचा करो ७. म्हे क्यांन जावां ८. भीखणजी उपगार मान है ९. थांरी श्रद्धा थां कन, म्हारी म्हां कनै १०. किण रा टोळा री? ११. थे तो जीवता बैठा हो ? १२. हिंसा सूं धर्म उठ गयो १३. इतरी फेर क्यूं ? १४. म्हांनै असूझतौ लेणी नहीं १५. पूण्यां तो कतणीयां में मोकळी दीसे है १६. कांई सूस करूं? १७. ओ मनोरथ तो फळतो दीस नहीं १८. कांई श्रद्धौ ? १९. अव्रत डावी कानी के जीमणी कानी ? २०. तीन मिक्छामि दुक्कडं २१. कांई चरचा करण रौ मन है ? २२. समकित आवणी दोरी २३. आछो देव उपदेश २४. छेहड़े संथारी करशां २५. पहिला पुन्य पछ निर्जरा २६. शुभ जोग आश्रव के निर्जरा ? २७. समदृष्टि री मति ते मतिज्ञान २८. दोयां में एक झूठ २९. दुमनो चाकर दुसमण सरीखौ ३०. भरत क्षेत्र में साधां रो विरह ३१. त्याग क्यूं भंगावो? ३२. चरचा इसी करता तो किसायक दीसता ? ३३. ऊंडी दृष्टि ३४. संका हुवै तौ चरचा पूछल्यो
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