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________________ अनुक्रम १४ ६ २७ ३० १. आगम-सम्पादन की कल्पना २. आगम-सम्पादन की घोषणा ३. आगम-सम्पादन का प्रारंभिक इतिहास ४. आगम-शोध-कार्य : एक पर्यवेक्षण ५. पाठ-संशोधन : एक मौलिक कार्य ६. शोध-कार्य में आनेवाली समस्याएं और समाधान ७. पाठ-परिवर्तन तथा अर्थ-विस्मृति ८. आगमपाठ-शोधन : कुछ मीमांस्य स्थल ९. आगम के कुछ विमर्शनीय शब्द १०. दक्षिण यात्रा और आगम-सम्पादन ११. प्राकृत भाषा और आगम-सम्पादन पर डॉ. उपाध्ये के विचार १२. आगम-कार्य पर डॉ. रोथ के विचार १३. वैभार पर्वत : आचार्य तुलसी का संकल्प १४. आगम-कार्य : नए नए उन्मेष १५. आगम-कार्य की दिशा में १६. सामूहिक वाचना का आह्वान १७. आगम-कार्य : विद्वानों से परामर्श १८. आगम-सम्पादन कार्य : विद्वानों की दृष्टि में १९. आगमों के व्याख्यात्मक ग्रन्थ २०. व्याख्या-ग्रन्थों का अध्ययन क्यों? ३४ ३८ ४२ ५५ ६२
SR No.032420
Book TitleAgam Sampadan Ki Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDulahrajmuni, Rajendramuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages188
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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