SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 126
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्री प्राचीनस्तवनावली [१११ ॥ स्तवन । गुमानी घर वरसत क्यों नहीं पानी । वरसत क्यों नहीं पानी हो ॥ गु० ॥ जीव जंत सब तरसन लागा, ए धरती सोही कुमलाणी ॥ हो० गु० ॥ १ ॥ सूक गया सरोवर, ऊड गया हंसाए, बेलड़ी आई कमलाणी ॥ हो गु० ॥ २ ॥ हरी हरी बूँद घटा जुं कहाइए, सरोवर नीर गलोला ॥ हो गु० ॥ ३ ॥ दादुर मोर पपैया बोलेए, कोयल मधुरीस वाणी हो ॥ गु० ॥ ४ ॥ सुर कहे प्रभु तु मारे भजनसेए, इण भवथीए मुझ तारो । परभवथी मोय तारो ॥ हो गु० ॥ ५ ॥ ॥ अथ स्तवन दादाजीका || अरे लाला श्रीजिनदत्त सूरिश्वरू, दादा प्रह ऊगमते सूररे लाला, भाव धरी पूजो सदा, कुंकुम घस मेली कपूररे लाला ॥ श्री० ॥ १ ॥ जीती चौसठ जोगणी, वश कीया बावन वीररे लाला ॥
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy