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________________ श्री प्राचीनस्तवमावली . . . . [१०९ ॥अथ नेमनाथजीनो स्तवन ८ वारनो ॥ सोमवारे प्रभुजी पधारयारे ।मथुरा नगरीमा आयारे। छप्पन कोड़ जादव मली आया॥ “केजो श्री नेमजी केम ना आयारे ॥१॥ मंगलवारेथी तोरण आयारे। पशु नाद सुणी मन थायारे ॥ पूछे शाश्वती केम मंगाव्या ॥ के०॥३॥ बुधवारे दया मन आणीरे। पशु छोड़ावे क्षमा गुण जाणीरे। राणी राजूल रोष भराणी ॥ के० ॥ ३ ॥ गुरूवारथी गिरनारे चढियारे । सहस्स पूर्व सह परिवरियारे । ठामो ठामथी पगला वरिया ॥ के०॥४॥ शुक्रवारे सहसा वन विराजेरे। प्रभु त्रिगड़ागड़मा राजेरे ॥ मेग वरणी देशापुर गाजे ॥ के०॥५॥ शनीवारेथी संजम धारीरे । लागे केवल ज्ञाननी ताडीरे॥ सहसावनमा मेल्या नर नारी ॥के० ॥६॥ अदीत्ते आणंदकारीरे। प्रभु गायोथी सुखकारीरे॥ श्रावक ने हितकारी ॥ के० ॥ ७॥ राजूल ऊभी
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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