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________________ naww.inwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwww भी प्राचीनस्तवनावली . . . . [१०३ समान छे लेख ॥ माता० ॥६॥ ए आठोइ कामणी जाया, सुख विलसो संसार । दिन पाछा पडिया पीछे जाया, भले लीजो संयम भार ॥जं० ॥७॥ रत्नजडितरो पीजरो माता, सूवो जाणे छे फंद। काम भोग संसारना माता, ज्ञानी वतावे छे फंद ॥ माता०॥८॥ तु मुझ अंधा लाकड़ी जाया, तु मुझ प्राण आधार । तुझ विन म्हारे जग सुनो जाया, तुझ विण घडीरे छमास ॥ ज०॥९॥ मात पिता मेलावडोमाता, मिलिया अनंति वार। तारण समरथ को नहीं ए माता, मातपितापरिवार ॥ माता०॥१०॥ पंचमहाव्रत पालणो जाया, पांचोइ मेरू समान । वावीश परीसह जीतनारे जाया, चारित्र खांडानी धार ॥ ज०॥ ११ ॥ ए आठोंइ कामणी जंबु, समझावी एकण हात । ए जिनरो धर्म ओलख्यो, एतो लेसे संजम भार ॥ जं०॥१२॥ मोह मति करो माताजी, माता, मोह कियो बंधे कर्म । आडा कांइ फिरों थे तो, करोजी
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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