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________________ न्यायविशारद न्यायाचार्य श्रीमयशोविजयजीनुं टुंक जन्मचरित्र. महात्मानो जन्म क्यारे ने कया शहेरमां श्रयो ? तेमना मात पिता कोण हता ? ने कई ज्ञातिना हता ? ए कोइ पण साधनवमे चोक्कस थइ शकतुं नथी. श्रीमान् सुधर्मास्वामीथी चाहया श्रावता मूळपाटे एवं थयेला न होवाथी तेमज जैनाचार्योमां पोतानां चरित्र लखवानी रुढी आत्मप्रशंसादि कारणोथी प्रचलित नहीं होवाथी ए संबंधमां विशेष हकीकत चोक्कसपणे मळी शकती नथी. जो मूळपाटे एवं थया होत तो पट्टावळी विगेरेमांथी केटलीक हकीकत नीकळी शकत, तेमज जो तेमना शिष्य कोइ पराक्रमी नीवड्या होत तो ते पोताना गुरुनुं चरित्र अवश्य लखत; कारण के एवी| रीते पोताना गुरुनुं चरित्र लखवानी प्रवृत्ति तो प्राचीनकालश्री श्रपणामां चाली आावती देखाय बे. श्री ही रसौभाग्य काव्य | विजयप्रशस्ति काव्य इत्यादि अनेक चरित्रात्मक काव्यो तेनां साक्षीभूत बे. या महात्माना चरित्र संबंधी कांइ कांइ हकीकत खाद्यखंकन, प्रतिमाशतक ने बत्तीसा बत्तीसीनी प्रशस्ति विगेरेमांथी मळी आवे के परंतु ते एवी शृंखला बद्ध नथी के जेथी एमनुं श्राखुं चरित्र जोमी शकाय तेमज तेमना करेला संख्याबंध ग्रंथोंपैकी जे जे लच्य बे ते सघळा एकता करी तेनी प्रशस्ति तेमज रचना विगेरे तपासी कोइए पए एवी हकीकत संपूर्ण एकत्र करी नथी के जेथी श्र | चरित्र लखवामां ए सहायभूत थइ परे तेमज कृतिमां पण पहेली कइ अने पीनी कश् ते जाणी शकाय.
SR No.023511
Book TitleNyayacharya Yashovijayji Krut Granthmala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJain Dharm Prasarak Sabha
PublisherJain Dharm Prasarak Sabha
Publication Year1909
Total Pages364
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size36 MB
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