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________________ 290 अलङ्कारमणिहारे जयतु जगति नित्यं लक्ष्मणार्यस्य पक्षो जयतु निगमचूडावेशिकेन्द्रस्य सूक्तिः । जयतु हयमुखीयास्थानसंपत्समृद्धिः जयतु च वृषशैले श्रीनिवासस्थिर श्रीः ।। २४२८ ॥ • इति श्रीमद्वेदमार्गप्रतिष्ठापनाचार्य परमहंसपरिव्राजकाचार्य सर्वतन्त्रस्वतन्त्रोभयवेदान्ताचार्य श्रीमत्कविकथक कण्ठीरवचरणनलि, नयुगळ विन्यस्तसमस्तात्मभर श्रीमद्रामानुज सिद्धान्त निर्धारणसार्वभौम श्रीमच्छ्रीनिवास ब्रह्मतन्त्रपरकालसंयमि सार्वभौम करुणाकटाक्षवीक्षिततत्कृपास माधगतब्रह्मविद्या वैशद्यस्य तत्तादश श्री श्रीनिवासदेशिकेन्द्रब्रह्म तन्त्रपरकालयतीन्द्र महादेशिक कृपासमुपार्जितरहस्य संप्रदायस्य तच्चरणनलिनसमर्पितात्मरक्षाभरस्य तादृशश्रीरङ्गनाथब्रह्मतन्त्रपरकालमुनिवरण्यमहादेशिककृपासुधासारसं प्राप्त तुरीयाश्रम ब्रह्मतन्त्र परकाल गुरुवरास्थानाभिषेकस्य श्री कर्णाटदिव्यरत्नसिंहासन साम्राज्योभिषिक्तं श्रीमन्महीशूरनगराधीश्वर श्रीकृष्णराज सार्वभौम संततिसंतत * देशिकस्य श्रीकृष्ण ब्रह्मतन्त्र परकालयतीन्द्रस्य कृतिषु अलंकारमणिहाराख्य मलंकारशास्त्रं संपूर्णम्. श्री श्री ब्रह्मतन्त्र परकाल गुरुपरम्परायै नमः समाप्तोयं प्रबन्धः V
SR No.023474
Book TitleAlankar Manihar Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorR Shama Shastry
PublisherOriental Library
Publication Year1929
Total Pages330
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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