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________________ ( ३ ) बालु आ व्याकरण रचायु छे । गागरमा सागरे समान हेमचन्द्रिका व्याकरणनुं अध्ययन करी बालजीवो पण व्याकरण शास्त्रना भावोने जाणी अन्य शास्त्रमां सरलताथी प्रवेश करी शकशे ए निर्विवाद सत्य छे । हेमचन्द्रिकाना रचयिता सुप्रसिद्ध शासनसम्राट्जगद्गुरु- तपोगच्छाधिपति सूरिचक्रचक्रवत्त-सर्वतन्त्रस्वतन्त्र - अनेकतीर्थोद्धारक - भूरिभूपालसन्मानित पूजितपादपद्म- बालब्रह्मचारी - परमाराध्यपाद परमपूज्य आचार्यदेवेश श्रीविजयनेमिसूरीश्वरजी म० श्रीना ख्यातनाम पट्टालंकार साधिकसातलाखश्लोकप्रमाणनूतनसंस्कृतसाहित्यना सर्जक अनुपमव्याख्यान सुधावर्षी साक्षर शिरोमणि बालब्रह्मचारी पूज्यपाद आचार्यदेव श्रीविजयलावण्यसूरीश्वरजी म० श्री छे । जेमनी साहित्यिक अनुपम शक्तिथी प्रसन्न थयेल गुरुभगवन्तश्रीओ उपाध्यायपदना पुनित प्रसंगे व्याकरणवाचस्पति-कविरत्न - अने शास्त्रविशारद ए ऋण बिरूदोथी नवाज्या हतां । हेमचन्द्रिकाकारमहर्षिना पुण्यनामथी जैन समाज अने साक्षरगण भाग्येज अज्ञात हशे । -
SR No.023427
Book TitleHemchandrika Vyakaranam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaylavanyasuri
PublisherGyanopasak Samiti
Publication Year
Total Pages156
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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