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________________ (७४) गई, ने जम अने चेतन बे पदार्थy यथार्थ ज्ञान थयु , अने वस्तु धर्मनुं ज्ञान थयुं , तेना प्रत्नावे जे पदार्थनो जे स्वन्नाव ने ते जाणे , एटले पठी रागक्ष श्रतो नथी; ए दशा पाम्या ने तेनने तो एकांत अने वस्ती बधुंए सरखं . तेमने कई ध्यान करवाने जूई स्थानक जोईतुं नथी. ए ध्यान तपनुं स्वरूप कडुं. ने कासगनामा तप. ते कायाने वोसरावीने एक स्थानमा रहेq ने जेटली वारनी स्थिरता होय तेटली वार प्रनुनुं स्मरण करवं ते. ___ ए मुजब उ प्रकारनो अन्यंतर तप कह्यो,बन्ने मलीने बारे प्रकारे तप कहो ले ते तपनो लानांतराय मटवाथी तपना आचारनी प्राप्ति पाय ठे, ते तपनो अंतराय शाथी पाय ले ? ज्यारे तप करतां कई शरीर नरम पमे त्यारे माणसना मनमां एवं आवे के तप को तेथी मने पीमा थई हवे तप नहीं करूं; आवो नाव आववाश्री जीव तपy अंतराय कर्म बांधे ने तो फरी तप करवाना नाव थता नथी, पण खरं कारण तो अशातावेदनी कर्म पूर्वे बांध्युं ते वेदनी कर्म उदय आवे , त्यारे शरीरे पी. मा थाय . जेणे असातावेदनी कर्म बांध्यं नथी ते तो घणो तप करे , पण तेने रोग अथवा पीमा यती नथी, माटे तप कर्यो ने कापी शरीरे वेदनी थई. तो ज्ञानी पुरुष तो विचारे डे के में कोई जीवने तप करतां अंतराय को हशे के मने वेदनी कर्मनो नदय तपस्यामां आव्यो, तेथी तपस्यानी वृद्धिबनशे नही; हवे तो हुँ वेदनी कर्म खपाववाने तत्पर थयो ढुं, माटे वेदनी कर्म समन्नावे नोगवq के फरी नवं कर्म न बंधाय, एम समन्नावमा रहीने तपस्यामाथी चित्तने खसेमता नथी, तेवा पुरुषने तपनो अंतराय तुटे , ने तप्पाचारनो लाग्न थाय .. . अने जे एम नावे के तप करवाथी शरीरे पीमा थई ते
SR No.023346
Book TitleAdhar Dushan Nivarak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnopchand Malukchand Sheth
PublisherAnopchand Malukchand Sheth
Publication Year1903
Total Pages232
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size18 MB
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