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________________ ग्रंथ प्रणेता की कलम से विद्वद्वर्य पूज्य आचार्यदेव श्रीमद् विजयकस्तुरसूरीश्वरजी महाराज 'प्राकृत विज्ञान पाठमाला' (आओ ! प्राकृत सीखें) पुस्तक हाथ में आने पर बुद्धिशाली मानवी के मन में यह जिज्ञासा पैदा होना सहज है कि 'प्राकृत' शब्द का क्या अर्थ हैं ? साहित्य के क्षेत्र में उसका क्या हिस्सा है ? अन्य भाषाओं के साथ उसका क्या संबंध है ? 'प्राकृत' का अर्थ क्या ? - प्रकृति सिद्ध जो कोई वस्तु हो, उन सब को 'प्राकृत' कहते है । 'प्राकृत' शब्द का इतना विस्तृत अर्थ होने पर भी यहां भाषा प्रकरण में भाषा के साथ संबंधित 'प्राकृत' शब्द लेना है अर्थात् प्रकृति सिद्ध जो भाषा, उसे प्राकृत कहते है । व्याकरण आदि से संस्कार नहीं पाए हुए दुनिया के प्राणी मात्र के सहज वचन व्यापार को प्रकृति कहते है । उसमें रही अथवा उसी भाषा को प्राकृत कहते है । प्राकृत भाषा के शब्द संस्कार दिए बिना भी आबाल गोपाल द्वारा बोले जा सकते हैं । प्राकृत की व्युत्पत्तियाँ :- कवि रुद्रट कृत काव्यालंकार पर श्री नमि साधु विरचित टिप्पण में प्राकृत शब्द की दो प्रकार से व्युत्पत्ति की है । 1) सकल जगज्जन्तूनां व्याकरणादिभिरनाहतः संस्कारः सहजो वचन व्यापारः प्रकृतिः तत्र भवं सैव वा प्राकृतम् ।
SR No.023125
Book TitleAao Prakrit Sikhe Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaykastursuri, Vijayratnasensuri
PublisherDivya Sandesh Prakashan
Publication Year2013
Total Pages326
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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