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________________ २३ (ज) 'कक्क' - शालिभद्रकक्क - पद्म (१३वीं शती) (झ) 'धवलगीत ' - जिनपति सरिधवल (मंगल) गीत ( १३वीं शती) -- साहरयण (ञ) 'प्रबन्ध' – विमलप्रबन्ध – लावण्य समय हम्मीरप्रबंध -अमृतकलश 'रूपक' और 'लोककथा ' (ट) 'रूपक' - भव्यचरित्र - जिनप्रभाचार्य ( १३वीं शती) (ठ) 'लोक कथा' - हंसराज - बच्छराजचोपाई - विजयभद्र (१३५५) ढोलामारु — कुशललाभ सिंहासनबत्रीसी - होरकलश (१५६०) (१५८०) 'गद्यमय कृतियाँ ' - (१५१२) (१५१९) (ङ) 'बालावबोध' - ( यह साहित्य - प्रकार कथा संक्षेप, दार्शनिक चर्चा, वादविवाद और प्रश्नोत्तरी के रूप में मिलता है ।) 'आराधना' पर बालावबोध 'अतिचार' पर बालावबोध 'षडावश्यक' - बालावबोध - तरुणप्रभ (ढ) 'वर्णक' - ( अनेक वर्णनों से भरपूर ) पृथ्वीचन्द्रचरित - माणिक्यसुन्दर (ण) 'व्याकरण' - बालशिक्षा-संग्रामसिंह मुग्धावबोध-औक्तिक - कुलमंडन (१२७४) (१२८४) (१३५५) (१४२२) (१२८०) (१३९४) पन्द्रहवीं शती के कवि लावण्यसमय और समयसुन्दर की अनेक प्रकार की कृतियाँ, जैसे-स्तवन, सज्झाय, छंद, विनती, हमचडी, संवाद, गीत इत्यादि ।
SR No.022869
Book TitleBharatiya Bhashao Ke Vikas Aur Sahitya ki Samruddhi Me Shramano Ka Mahattvapurna Yogdan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund
Publication Year1979
Total Pages34
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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