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(ज) 'कक्क' - शालिभद्रकक्क - पद्म
(१३वीं शती)
(झ) 'धवलगीत ' - जिनपति सरिधवल (मंगल) गीत ( १३वीं शती)
-- साहरयण
(ञ) 'प्रबन्ध' – विमलप्रबन्ध – लावण्य समय
हम्मीरप्रबंध -अमृतकलश
'रूपक' और 'लोककथा '
(ट) 'रूपक' - भव्यचरित्र - जिनप्रभाचार्य
( १३वीं शती)
(ठ) 'लोक कथा' - हंसराज - बच्छराजचोपाई - विजयभद्र (१३५५) ढोलामारु — कुशललाभ सिंहासनबत्रीसी - होरकलश
(१५६०)
(१५८०)
'गद्यमय कृतियाँ '
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(१५१२) (१५१९)
(ङ) 'बालावबोध' - ( यह साहित्य - प्रकार कथा संक्षेप, दार्शनिक चर्चा, वादविवाद और प्रश्नोत्तरी के रूप में मिलता है ।)
'आराधना' पर बालावबोध
'अतिचार' पर बालावबोध
'षडावश्यक' - बालावबोध - तरुणप्रभ (ढ) 'वर्णक' - ( अनेक वर्णनों से भरपूर ) पृथ्वीचन्द्रचरित - माणिक्यसुन्दर
(ण) 'व्याकरण' - बालशिक्षा-संग्रामसिंह
मुग्धावबोध-औक्तिक - कुलमंडन
(१२७४)
(१२८४)
(१३५५)
(१४२२)
(१२८०)
(१३९४)
पन्द्रहवीं शती के कवि लावण्यसमय और समयसुन्दर की अनेक प्रकार की कृतियाँ, जैसे-स्तवन, सज्झाय, छंद, विनती, हमचडी, संवाद, गीत इत्यादि ।