SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 21
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २० (झ) 'उपहासात्मक कथा'-इस प्रकार की कथाओं को एक ही कृति में ग्रन्थस्थ करने की यह विशेष पद्धति है । अमितगति द्वारा रचित 'धर्मपरीक्षा' (जैन) नामक ऐसा ही ग्रंथ है जिसमें अंधविश्वास पर व्यंग कसा गया है। (ज) 'पादपूर्ति काव्य'-अन्य रचनाओं के पद्यों में से अन्तिम चरण लेकर अपनी तरफ से प्रारंभिक तीन चरण जोड़ कर ये काव्य कृतियाँ (जैन) बनायी गयी हैं। 'मेघदूत' के आधार पर जिनसेन का 'पाश्र्वाभ्युदय-काव्य', 'शिशुपालवध' के आधार पर मेघविजयगणि(१७वीं शती) का 'देवानन्द-महाकाव्य' और 'नैषधचरित' के आधार पर 'शान्तिनाथ चरित्र' ऐसी ही काव्य कृतियाँ हैं। (ट) “पादपूर्ति स्तोत्र'-ये स्तोत्र (जैन) प्राचीन स्तोत्रों के पद्यों के अन्तिम चरण के आधार पर बनाये गये हैं । 'कल्याणमन्दिर-स्तोत्र' के आधार पर भानुप्रभसूरि (१७३४ ई. स.) का 'जैनधर्मवरस्तोत्र', 'भक्तामरस्तोत्र' के आधार पर समयसुन्दरगणि (ई.स. १६२३) का 'ऋषभ भक्तामर स्तोत्र', अजैन, 'शिवमहिम्नस्तोत्र' के आधार पर ऋषिवर्धनसरि (१५वीं शती) का 'समस्यामहिम्नस्तोत्र' इत्यादि अनेक स्तोत्र मिलते हैं। (ठ) 'विज्ञप्ति पत्र'-'प्रभाचन्द्रीय विज्ञप्ति' पत्र (जैन) (ल. १२०० ई. स.) : यह पत्र बड़ौदा से प्रभाचन्द्रसूरि द्वारा भानुप्रभसूरि पर लिखा गया है और इसकी शैली अलंकृत-काव्यमय है। इस प्रकार के अनेक विज्ञप्तिपत्र १८वीं शती तक के मिलते हैं। (ड) 'कथाकोष'-ये अनेक लघु कथाओं के संग्रह (जैन) है जिनमें धार्मिक उपदेश देते हुए पुण्य और पाप का फल दिखाते हुए तथा विनय, दान, शोल, संयम, तप इत्यादि के सुफल स्वरूप दृष्टान्त के रूप में कथाएँ कही गयी है। इस प्रकार के
SR No.022869
Book TitleBharatiya Bhashao Ke Vikas Aur Sahitya ki Samruddhi Me Shramano Ka Mahattvapurna Yogdan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorK R Chandra
PublisherPrakrit Jain Vidya Vikas Fund
Publication Year1979
Total Pages34
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy