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________________ उत्तराध्ययन सूत्र. २४१ तण्हाभिभूयस्स अदत्तहारिणो, सद्दे अतित्तस्स परिग्गहे य । मायामुसं वइढइ लोभदोसा, तत्थावि दुक्खा ण विमुच्चई से ॥४३॥ मोसस्स पच्छा य पुरत्थओ य, पओगकाले य दुही दुरंते । एवं अदत्ताणि समाययंतो, सद्दे अतित्तो दुहिओ अणिस्सो ॥४४॥ सदाणुरत्तस्स णरस्स एवं, कत्तो सुहं होज कयाइ किंचि । तत्थोवभोगे वि किलेसदुक्खं, णिवत्तई जस्स कएण दुक्खं ॥४५॥ एमेव सदम्मि गओ पओसं, उवेइ दुक्खोघपरंपराओ। . पदुट्ठचित्तो य चिणाइ कम्मं, जं से पुणो होइ दुहं विवागे ॥४६॥ सद्दे विरत्तो मणुओ विसोगो, एएण दुक्खोघपरंपरेण । ण लिप्पए भवमझे वि संतो, जलेण वा पुक्खरिणीपलासं ॥४७॥ घाणस्स गन्धं गहणं वयंति, तं रागहेउं तु मणुण्णमाहु । तं दोसहेडं अमणुण्णमाहु, समो य जो तेसु स वीयरागो ॥४८॥ गंधस्स घाणं गहणं वयंति, घाणस्स गंधं गहणं वयंति । । रागस्स हेउं समणुण्णमाहु, दोसस्स हेउँ अमणुण्णमाहु ॥४९॥ शब्देऽ० ॥४३॥ शब्दे० ॥४४॥ शब्दानुर० ॥४५॥ शब्दे ग० ॥४६॥ शब्दे वि० ॥४७॥ घाणस्य गन्धं ॥४८॥ गन्धस्य घ्राणं, घाणस्य गन्धं ॥४९॥
SR No.022588
Book TitleUttaradhyayanani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSuryodaysagarsuri, Narendrasagarsuri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1992
Total Pages330
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size32 MB
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