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________________ पावसमाणिज्ज [-१७ आयरियउवज्झाएहिं सुयं विणयं च गाहिए। ते चेव खिसई बाले पावसमणि त्ति वुच्चई ॥४॥ आयरियउवज्झायाणं सम्मं नो पडितप्पह। अप्पडिपूयए थद्धे पावसमणि त्ति वुच्चई ॥५॥ सम्मघमाणो पाणाणि बीयाणि हरियाणि य। असंजए संजयमनमाणे पावसमाण त्ति वुच्चई ॥६॥ संथारं फलगं पीढं निसेज्जं पायकम्बलं । अप्पमज्जियमारुहइ पावसमणि त्ति वुच्चई ॥ ७॥ दवदवस्स चरई पमत्ते य अभिक्खणं। उल्लंघणे य चण्डेय पावसमणि त्ति वुच्चई ॥८॥ पडिलेहेइ पमत्ते अवउज्झह पायकम्बलं। पडिलेहाअणाउत्ते पावसमाण त्ति वुच्चई ॥९॥ पडिलेहेइ पमत्ते से किंचि हु निसामिया । गुरुपारिभावए मिचं पावसमणि त्ति वुचई ॥१०॥ बहुमाई पमुहरी थद्धे लुद्धे आणिग्गहे। असंविभागी अचियत्ते पावसमणि त्ति वुच्चई ॥११॥ विवादं च उदीरेइ अहम्मे अत्तपन्नहा। वुग्गहे कलहे रत्ते पावसमाण त्ति वुच्चाई। १२॥ अथिरासणे कुक्कुईए जत्थ तत्थ निसीयई । आसणम्मि अणाउत्ते पाबसमाण त्ति वुच्चाई ॥१३॥ ससरक्खपाए सुबई सेज्जं न पडिलेहह । संथारए अणाउत्ते पावसमणि त्ति वुच्चई ॥ १४ ॥ दुद्धदहीविगईओ आहारेह अभिक्खणं। अरए य तवोकम्मे पावसमणि त्ति वुच्चई ॥१५॥ अत्यन्तम्मि य सूरम्मि आहारेइ अभिक्खणं । चोइओ पडिचोएइ पावसमणि त्ति वुच्चई ॥ १६ ॥ आयरियपरिचाई परपासण्डसेवए। गाणंगणिए दुन्भूए पावसमणि त्ति वुच्चई ॥१७॥ सयं गेहं परिचज्ज परगेहसि वावडे। निमित्तेण य ववहरई पावसमणि त्ति वुच्चई ॥१८॥
SR No.022572
Book TitleUttaradhyayan Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorR D Wadekar, N V Vaidya
PublisherFergussion College
Publication Year1954
Total Pages132
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size10 MB
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