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________________ $ Sutra 102] औपपातिकसूत्रम् [७५ वंदित्तए वा णमंसित्तए वा जाव पज्जुवामित्तए वा, णण्णत्थ अरिहंते वा अरिहंतचेइयाइं वा। SUTRA 100. अम्मडे णं भंते ! परिव्वायए कालमासे कालं किच्चा कहिं गच्छिहिति ? कहिं उववन्जिहिति ? गोयमा! अम्मडे गं परिव्वायए उच्चावएहिं सीलव्वयगुणवेरमण- 5 पच्चक्खाणपोसहोववासेहिं अप्पाणं भावमाणे बहूई वासाई समणोवासयपरियायं पाऊणिहिति, २ ता मासियाए संलेहणाए अप्पाणं झूसित्ता सैष्टिं भत्ताइ अणसणाए छदित्ता आलोइयपडिकते समाहिपत्ते कालमासे कालं किच्चा बंभलोए कप्पे देवत्ताए उववज्जिहिति । तत्थ णं अत्थेग- 10 इयाणं देवाणं दस सागरोवमाइं ठिई पण्णत्ता । तत्थ णं अम्मडस्स वि देवस्स दस सागरोवमाइं ठिई । SUTRA 101. से णं भंते ! अम्मडे देवे ताओ देवलोगाओ आउक्खएणं भवक्खएणं ठिइक्खएणं अणंतरं चयं चइत्ता, कहिं गच्छिहिति कहिं उववज्जिहिति ? SUTRA 102. ___गोयमा ! महाविदेहे वासे जाई कुलाई भवंति अड़ाई दित्ताइं वित्ताई वित्थिण्णवि उलभवणसयणासणजाणवा हणाई बहुधणजायख्वरययाइं आओगपओगसंपउत्ताई विच्छड्डियपउरभत्तपाणाई बहुदासीदासगोमहिसगवेलगप्पभूयाई बहुजणस्स अपरिभूयाइं तहप्पगोरसु कुलेसु पुमत्ताए 20 पच्चायाहिति । 15 १L. B. अरहते. २ । सठ्ठिभत्ताई. ३ A विच्छिण्ण.
SR No.022570
Book TitleOvavaiya Suttam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorN G Suru
PublisherN G Suru
Publication Year1931
Total Pages104
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aupapatik
File Size6 MB
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