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________________ TLAMHRIRADIA s abaidation तत्त्वार्थसूत्र त्वारिंशद्धिपञ्चभेदा यथाक्रमम् ॥५॥ मतिश्रुतावधिमनःपर्ययकेवलानाम् ॥ ६॥ चक्षुरचक्षुरवधिकेवलानां निद्रानिद्रानिद्राप्रचलाप्रचलाप्रचलास्त्यानगृद्धयश्चा७॥ सदसदेद्ये ॥८॥ दर्शनचारित्रमोहनीयाकषायकषायवेदनीयाख्यात्रिदिनवषोडशभेदाः सम्यक्त्वमिथ्यात्वत दोहा। पैन नव दो अठवीस चउ, व्यालिस दौ अरु पांच । आठ भेदके भेद जे, सत्तानव है सांच ॥ ५ ॥ चौपाई। मैति श्रुति अवधि मनपर्यय जान । केवल ज्ञानावर्णी मान ॥ चक्षु अचक्षु अवधि लखि लेउ। केवल दर्शन अवरन देउ॥६॥ भेद पांचमो निद्रा जान । निद्रानिद्रा छटो बखान ॥ प्रचलाभेद सातमों धीर । प्रचलाप्रचला अष्टम वीर ॥७॥ स्त्यानगृद्ध सो नवमों जान । दर्श अवर्णी भेद बखान ॥ सांता और असाता दोय । यही वेदनी भेद सु होय ॥ ८ ॥ दर्शमोहनी तीन प्रकार । चारित्रमोहनी दो निरधार ॥ पद्धरी छन्द । अकषायवेदनी नौ प्रकार । अरु सोलह भेद कषाय धार । सम्यक प्रकृती मिथ्यात जान । अरु मिश्र मिथ्यात कषाय मान॥९॥ -
SR No.022517
Book TitleMokshshastra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChhotelal Pandit
PublisherJain Bharti Bhavan
Publication Year1867
Total Pages70
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Gujarati & Book_Devnagari
File Size5 MB
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