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________________ ४१२ मूलाचारमनुष्यगतिमें उत्पन्न होते हैं उनका तिर्यंचोंमें जन्म नहीं होता ॥ ११७८ ॥ आजोदिसित्ति देवा सलागपुरिसाण होंति तेणियमा। तेसिं अणंतरभवे भयणिजं णिव्वुदीगमणं ॥११७९।। आज्योतिष इति देवा शलाकापुरुषा न भवंति ते नियमात् । तेषामनंतरभवे भाज्यं नितिगमनं ॥ ११७९ ॥ अर्थ-भवनवासीसे लेकर ज्योतिषीपर्यंत देव तीर्थंकर आदि शलाकापुरुष नहीं होते और उनके आगेके जन्ममें मोक्षगमन होवे भी अथवा नहीं भी होवे ॥ ११७९ ॥ तत्तो परं तु गेवजं भयणिजा सलागपुरिसा दु । तेसिं अणंतरभवे भयणिजा णिव्वुदीगमणं ॥११८०॥ ततः परं तु ग्रैवेयकं भजनीयाः शलाकापुरुषास्तु । तेषामनंतरभवे भजनीयं निवृतिगमनं ॥ ११८० ॥ अर्थ-उसके वाद सौधर्मवर्गसे लेकर नव ग्रैवेयक पर्यंतके देव शलाकापुरुष कदाचित् होते भी हैं अथवा नहीं भी होते और आगेके भवमें मोक्षगमन कदाचित् होता भी है अथवा नहीं भी होता ॥ ११८० ॥ णिव्वुदिगमणे रामत्तणे य तित्थयरचकवहित्ते । अणुदिसणुत्तरवासी तदो चुदा होंति भयणिजा ॥ निवृत्तिगमनेन रामत्वेन च तीर्थकरचक्रवर्तित्वेन । अनुदिशानुत्तरवासिनः तेभ्यः च्युता भवंति भजनीया ॥ अर्थ-अनुदिश और अनुत्तर विमानवासी देव वहांसे
SR No.022324
Book TitleMulachar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManoharlal Shastri
PublisherAnantkirti Digambar Jain Granthmala
Publication Year1919
Total Pages470
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size25 MB
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