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मूलाचार
अर्थ-पहली रत्नप्रभा नामा नरककी पृथिवीमें नारकियोंकी उंचाई सात धनुष तीन हाथ छह अंगुल प्रमाण है ॥ १०५५ ॥ बिदियाए पुढवीए णेरइयाणं तु होइ उस्सेहो। पण्णरस दोणि बारस धणु रदणी अंगुला चेव१०५६
द्वितीयायां पृथिव्यां नारकाणां तु भवति उत्सेधः । पंचदश द्वौ द्वादश धनूंषि रत्नयः अंगुलाश्चैव ॥ १०५६ ॥
अर्थ- शर्करा पृथिवीमें नारकियोंके शरीरकी उंचाई पंद्रह धनुष दो हाथ बारह अंगुल प्रमाण है ॥ १०५६ ॥ तदियाए पुढवीए रइयाणं तु होइ उस्सेहो। एकत्तीसं च धणू एगा रदणी मुणेयव्वा ॥ १०५७ ॥
तृतीयायां पृथिव्यां नारकाणां तु भवति उत्सेधः। एकत्रिंशच धनूंषि एका रनिः मंतव्या ॥१०५७ ॥
अर्थ-बालुका पृथिवीमें नारकियोंके शरीरकी उंचाई इकतीस धनुष एक हाथ जानना चाहिये ॥ १०५७ ॥ चउथीए पुढवीए णेरइयाणं तु होइ उस्सेहो। बासट्ठी चेव धणू बे रदणी होंति णायव्वा ॥ १०५८॥
चतुर्थी पृथिव्यां नारकाणां तु भवति उत्सेधः । द्वाषष्टिः चैव धनूंषि द्वे रत्नी भवंति ज्ञातव्याः ॥१०५८॥
अर्थ-पंकप्रभा पृथिवीमें नारकियोंकी उंचाई बासठ धनुष दो हाथ प्रमाण है ऐसा जानना ॥ १०५८ ॥ पंचमिए पुढवीए रइयाणं तु होइ उस्सेहो । सदमेगं पणवीसं धणुप्पमाणेण णादव्वं ॥ १०५९॥ पंचम्यां पृथिव्यां नारकाणां तु भवति उत्सेधः।