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नमः परमात्मने । श्रीवट्टकेरखामीकृत मूलाचार।
(उत्थानिकाछायाहिंदीभाषाटीका सहित)
मूलगुणाधिकार ॥ १॥
दोहा-वंदौं श्रीजिनसिद्धपद, आचारजउवझाय ।
साधुधर्मजिनभारती, जिनग्रहचैत्यसहाय ॥ वट्टकेरखामी प्रणमि, नमि वसुनंदीसरि ।
मूलाचार विचारिकें, भाषौं लखि गुणभूरि ।। आगे 'मूलग्रंथकार मंगलाचरणपूर्वक मूलगुणोंके कहनेकी प्रतिज्ञा करते हैं;
मूलगुणेसु विसुद्धे वंदित्ता सवसंजदे सिरसा । इहपरलोगहिदत्थे मूलगुणे कित्तइस्सामि ॥१॥ मूलगुणेषु विशुद्धान् वंदित्वा सर्वसंयतान् शिरसा । इहपरलोकहितार्थान् मूलगुणान् कीर्तयिष्यामि ॥१॥ अर्थ-मूलगुणोंके निमित्तसे निर्मल हुए ऐसे सब संयमि