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________________ ३०० मूलाचारशसे जिनोंने सब लोकका सार जान लिया है, पदार्थों में शंकारहित ग्लानिरहित अपने बलके समान जिनके पराक्रम ( उत्साह ) हैं ऐसे साधु हैं ॥ ८२८ ॥ अणुबद्धतवोकम्मा खवणवसगदा तवेण तणुअंगा। धीरा गुणगंभीरा अभग्गजोगाय दिढचरित्ता य ८२९ आलीणगंडमंसा पायडभिउडीमुहा अधियदच्छा। सवणा तवं चरंता उकिणा धम्मलच्छीए ॥ ८३०॥ आगमकदविण्णाणा अटुंगविदूयबुद्धिसंपण्णा । अंगाणि दसय दोणिय चोद्दस य धरंति पुव्वाइं८३१ धारणगहणसमत्था पदाणुसारीय बीयबुद्धीय । संभिण्णकुट्ठबुद्धी सुयसागरपारया धीरा ॥ ८३२॥ सुदरयणपुण्णकण्णा हेउणयविसारदा विउलबुद्धी। णिउणत्थसत्थकुसला परमपदवियाणया समणा ८३३ अवगदमाणत्थंभा अणुस्सिदा अगविदा अचंडा य। दंता मद्दवजुत्ता समयविदण्णू विणीदा य ॥ ८३४ ॥ उवलद्धपुण्णपावा जिणसासणगहिदमुणिदपज्जाला। करचरणसंवुडंगा झाणुवजुत्ता मुणी होति ॥ ८३५ ॥ अनुबद्धतपःकर्माणः क्षमणवशंगताः तपसा तन्वंगाः। धीरा गुणगंभीरा अभग्नयोगा दृढचरित्राश्च ॥ ८२९ ॥ आलीनगंडमांसाः प्रकटभ्रकुटीमुखा अधिकाक्षाः। श्रमणाः तपश्चरंत उत्कीर्णा धर्मलक्ष्म्या ॥ ८३० ॥ आगमकृतविज्ञाना अष्टांगविदुषीबुद्धिसंपन्नाः। .. अंगानि दश च द्वे चतुर्दश च धारयति पूर्वाणि ॥८३१॥
SR No.022324
Book TitleMulachar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManoharlal Shastri
PublisherAnantkirti Digambar Jain Granthmala
Publication Year1919
Total Pages470
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size25 MB
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