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________________ ॥१३७॥ TOTOEN स्तेन चंक्रमहिलासिनीस्खलत्पदनूपुररवेण. व्याजस्तुतिनामकोऽयमलंकारः.(उ)॥१७॥ सकारंतियसोवण–विनछानवकंबिपुत्रजग्गामि, किं चिंतिसि अश्यालिंमिवट्टयं सा कुतो जलणा. ॥ ६ए॥ (टीका)—एवंच रोहकेण पठिते तुष्टमना नरनाथः-सकारंतियसोवणत्ति सत्कारं वस्त्रपुष्पनोजनाबदनादिप्रदानरूपं तस्य चकार, रात्रिवृत्तांतोपखंननिमित्तमंतिके स्वस्यैव समीपे स्वप्नं निजाताभरूपमनुज्ञातवान्. ततोऽसौ मार्गखेदपरिश्रांततया प्रथमयामिन्यामेव निरनिशानाक् संपन्नः . विनानिवकंक्षित्ति प्रथमयामिनीयामांते च तउत्तरदानकृतकौतुकेन विबुधेन कृतनिजामोशेण नृपेणाविबुध्यमानोऽसौ कंबि कया बोलायष्टिरूपया स्पृष्ट-स्तदनु-पुबत्ति जागरितश्च सन् पृष्टः “ किं स्वपिसि के वांकी टेमी फरती विलासिनीअोना बथमता पगोमां रहेली नेवरीअोना खणखणाटना बीधे.-ा व्याजस्तुतिनामे अलंकार छे. १७ ___ सत्कार करी पासे सूवामयु. जागेझा राजाए कंबा अमकाबी पूछतां ( तेणे कडं के ) जागुं . शुं चिंतवेचे (एम पूछतां तेणे कयु के ) बकरीनी बीम। गोळ केम थाय छे ? ते केम थाय ? पेटनी अग्निथी. ६५ टीका.-एम रोहाए चटुपाठ करतां राजाए खुश थइ तेने वस्त्र पुष्प जोजन वगेरथी सत्कार कररी रातनी हकीकत जणावी पोताना पासे सूवाड्यो. हवे रोहो रस्ते चानी थाकेनो होवाथी रातना पेहेला जागमांज जर ऊंघमां पी. गयो. बाद पेहेने पहोरना छो जागेला राजाए ते के उत्तर आपे ने तेना कौतुकथी तेने बूम मारी बतां ते न जाग्यो त्या श्री उपदेशपद.
SR No.022167
Book TitleUpdeshpad Part 01
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
Author
PublisherLalan Niketan Madhada
Publication Year1925
Total Pages420
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari & Book_Gujarati
File Size13 MB
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