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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir आराहेइत्ता चरिमेहिं उस्सासनीसासेहिं सिद्धे बुद्धे मुक्के परिनिव्वुडे सव्वदुक्खप्पहीणे । ७७ । भंतेत्ति भगवं गोयमे समणं भगवं| महावीरं वंदति नभसति त्ता एवं वदासी से नूर्ण भंते ! सेटियस्सयतणुयस्सय किवणस्सय खत्तियस्सयसमा चेव अपच्चक्खाणकिरिया कजइ ?, हंता गोयमा ! सेटियस्स य जाव अपच्चक्खाणकिरिया कज्जइ, से केण्टेणं भंते !., गोयमा ! अविरतिं पडुच्च से तेण०॥ गोयमा ! एवं वुच्चइ सेट्ठियस्स य तणु० जाव कज्जइ १७८ । आहाकम भुंजमाणे समणे निग्गंथे किं बंधइ किं पकोइ किं चिणाइ किं, उवचिणाइ?, गोयमा ! आहाकम् णं भुंजमाणे० आउयवजाओ सत्त कम्प्यगडीओ सिदिलबंधणबद्धाओ धणियबंधणबद्धाओ। परे जाव अणुपरियट्टइ,सेकेणटेणं जाव अणुपरियदृ३?, गोयमा ! आहाम्णं भुजमाणे० आयाए धम्म अइक्कमइ आयाए धम्म अइकममाणे पुढविकायं ावकंखइ जाव तसकायं ावकंखइ जेसिंपिय णंजीवाणं सरीराइं आहारमाहारेइ तेऽवि जीवे नावकंखइ, से तेणढेणं गोयमा ! एवं वुच्चइ आहाकम्यं णं भुंजमाणे० आउयवजाओ सत्त कम्पपगडीओ जाव अशुपरियट्टइ, फासुएसणिज भंते ! भुंजमाणे० किं बंघइ जाव उवचिणाइ?, गोयमा! फासुएसणिज णं भुंजमाणे० आउयवजाओ सत्त कम्मपयडीओ धणियबंधणबद्धाओ सिढिलबंधणबद्धाओ परेइ जहा संवुडे णं, नवरं आउयं च णं कम्मं सिय बंदइ सिय नो बंधइ, सेसं तहेव जाव वीईवयइ, से केण्डेणं जाव वीईवयइ ?, गोयमा ! फासुएसणिज्ज भुंजमाणे समणे निग्गंथे आयाए धम्म नो अइक्कमइ आयाए धम|| अणइकममाणे पुढविकाइयं अवकंखति जाव तसकायं अवकंखइ जेसिपि यणं जीवाणं सरीराई आहारेइ तेऽवि जीवे अवकंखति से ॥ श्रीभगवती सूत्रं ॥ पू. सागरजी म. संशोधित For Private And Personal Use Only
SR No.021005
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Pragnapti Sutra Part 01 Shwetambar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPurnachandrasagar
PublisherJainanand Pustakalay
Publication Year2005
Total Pages300
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size6 MB
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