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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir - %3 वहसुआहैऔरजनावकाकोलहे केसुर्मालगाश्री किनेत्रीको वहजोतवढा ताहै ओरवालों को नगा|| ताहै ओररातकोसोने के समय यहसुलिगानामा नत्रोंकीजोतवढाताहै-मोरवाहरीवालोंकोगिर। नेसेरक्षारषताहौरजोगिरहोजनकोजमाता हेमोरजोकोईदूसरीवस्तुमुनासिवकेसंगभिला कषायतोषूनीववासीरीररुधिरथूकनेको। दूरकरताहे॥सथसहलेलजससदाफा रसीमेंहलेलेस्पाहोरहिंदी जंगीहडोरवि शेषछोटीकोजवाहडकहते हेंसोपहलेदरजामें। सर्द और दूसरे में खुश्क है और हजरतकाकोला है केकालीघाने सेस्वर्गप्राप्त होताहै स्वाद मेंतीक उधी परंतुहररोगोंसेवचाती है।वायकीदस्त के हारानिकालतीहोररुधिरको निर्मलकरती है। बवासीरकोषोतीहै ओरगलितकुष्टकोगुण करें। औरभीतरीजोडों कोवलम्राप्तकरेहै ओरउदरकी तरीकोदूर करे।अथवनफसजाफारसी में। ठीकरवनफशापहलेदस्जामेंसर्दौर दूसरेमेंतर हैनोरनबीसाहवकाकोल केसवतेलावनफसा कातेलसारखजुर्गहै जेसें सवमनुष्यों में मेंवडाह पिनकोषोधोरछाती परोपनकोदरकरें और छाती औरषांसी काहनह पाने में और गुर दहकीपीडा और पहलू-औरमस्तकपीड़ा औरकर करोगोंको औरसरदी को गुरुगदायकवाने ओरला। |गानेसेओस्जोयाकोलेपकरैतोसूजनदरहोजाय। औररवासीको - For Private and Personal Use Only
SR No.020831
Book TitleTibba Ratnakar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Munshi, Bansidhar Munshi
PublisherKanhaiyalal Munshi
Publication Year1882
Total Pages292
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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