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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ( १२३ ) ( ढाल २, रामचन्द्र के बाग - ए राह ) एक दिन प्रणणी पाय, सुव्रत साधुतणारी । विनये वनवे सेठ, मुनिवर करी करुणारी ॥ १ ॥ दाखो मुज दिन एक, थोडो पुण्य कियोरी । वाधे जिम वडबीज, शुभ अनुबन्ध धरोरी || २ || मुनि भाखे महाभाग्य, पावन पर्व घणारी एकादशी सुविशेष, तेहमां सुण सुमनारी ॥ ३ ॥ सित एकदादशी सेव, मास इग्यारे लगेरी । अथवा वरस इग्यार, ऊजवी तपसुं वरेरी ॥ ४ ॥ सांभली सद्गुरु वेण, आनन्द अति उल्लस्योरी । तप सेवी ऊजवीय, आरण स्वर्ग वस्योरी ॥ ५ ॥ एकवीस सागर आयु, पाली पुण्य वसेरी । सांभल केसवराय अगल जेह थ सेरी ॥ ६ ॥ सौरीपुरम सेठ, समृद्धिदत्त बड़ोरी । प्रीतिमती प्रिया तास, पुण्ये जोग जड़ोरी ॥ ७ ॥ तस कूंखे अवतार, सुदिन शुभ सुपनेरी । जनम्यो पुत्र पवित्र, उत्तम ग्रह शकुनेरी ॥ ९ ॥ नाल निक्षेप निधान, भूमिथी प्रगट थयोरी । गर्भ दोहद अनुभाव, सुव्रत नाम थयोरी || ९ || बुद्धि उद्यम गुरु योग शास्त्र अनेक भण्योरी । यौवन वय अग्यार, रूववती परण्योरी ॥ १० ॥ जिनपूजन मुनिदान, सुव्रत पच्चक्खाण घरेरी । इग्यारे कंचन कोड, नायम पुण्य भरेरी ॥ ११ ॥ धर्मघोष अणगार, तिथि अधिकार कहेरी । सांभली सुव्रत सेठ, जातिस्मरण लहेरी || १२|| जिन प्रत्यय मुनिसाख, भक्ति तप ऊचरेरी | एकादशी दिन आठ, पहोरो पोसो करेरी ॥ १३॥ For Private And Personal Use Only
SR No.020303
Book TitleDevasia Raia Padikkamana Suttam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayantvijay
PublisherAkhil Bharatiya Rajendra Jain Navyuvak Parishad
Publication Year1964
Total Pages188
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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