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चिकित्सा-चन्द्रोदय।
कानके तेल में विषके लक्षण ।
अगर कानोंमें डालनेके तेलमें विष होता है और वह कानोंमें डाला जाता है, तो कान बेकाम हो जाते हैं, सूजन चढ़ आती और. कान बहने लगते हैं । अगर सा हो, तो शीघ्र ही कर्णपूरण और नीचेका इलाज करना चाहियेः
चिकित्सा । (१) शतावरका स्वरस, घी और शहद मिलाकर, कानोंमें डालो ।
(२) कत्थेके शीतल काढ़ेसे कानोंको धोओ।
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अञ्जनमें विषके लक्षण
अगर सुरमे या अञ्जनमें विष होता है, तो उनके लगाते ही नेत्रोंसे आँसू आते हैं, जलन और पीड़ा होती है, नेत्र घूमते हैं और बहुधा जाते भी रहते हैं; यानी आदमी अन्धा हो जाता है।
चिकित्सा । (१) ताजा घी पीपल मिलाकर पीओ।
(२) मेढ़ासिंगी और वरणेके वृक्षके गोंदको मिलाकर और पीसकर आँजो।
(३) कैथ और मेढ़ासिंगीके फूल मिलाकर आँजो। (४) भिलावेके फूल आँजो। (५) दुपहरियाक फूल आँजो। (६) अङ्कोटके फूल आँजो।
(७) मोखा और महासर्जके निर्यास, समन्दरफेन और गोरोचन-इन सबको पीसकर नेत्रों में आँजो ।
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