________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
Achar
२६५
तार ॥ एह गिरि० ॥१॥ नव लखो टीलोस्युं करु ललना, लाला होशे जवाली जोडावे ॥ एह० ॥ सुनंदानो नाहलो ल० लालाहो त्रिभुवन तिलक भेटावी, ॥ एह० ॥ २ ॥ ऋषभ सेनादिक जिनवरा ललना, लालाहो मुक्ति गया इणे ठाम ॥ एह० ॥ जिनतणी फरमी भूमिका ललना, लालाहो सिद्ध अनंतानो ठाम ॥ एह० ॥ ३॥ इणी चोवीशी सिद्धाचले ललना, लालाहो नेमि विना त्रेवीस ॥ एह० ॥ भावी चोवीशी आवशे ललनां, लालाहो पद्मनाभादि जिनेश, ॥ ॥ एह० ॥ ४ ॥ आदि जिणंद समोसर्या ललना, लालाहो पूर्व नवाणुं वार, ॥ एह०॥ चोमासुं अजित जिनेश्वर ललना, लालाहो शान्ति चोमासुं सार ॥ ॥ एह० ॥५॥ पांच कोमि परिवारशूललना, लालाहो ऋषभसेना पुंडरीक ॥ एह. ॥ चैत्री पुनमे शिव संपदा ललना, लालाहो पांमी थया नीरभीक, ॥ एह० ॥ ६ ॥ कार्तिक पुनम कामित वर्या ललनां, लालाहो प्राविम वरिषेण दोय ॥ एह०॥ दस कोडि मुनि महंतशुं ललनां, लालाहो प्रणमी पातक धोय ॥ एह० ॥
For Private And Personal Use Only