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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir मत्तदन्तिन् ८०९ मद् मत्तदन्तिन् (पुं०) हस्ति, हाथी। मत्तनागः (पुं०) गज, हस्ति, करि। मत्तवारणः (पुं०) स्वान्मत्तवारणः पुंसि मददुर्दान्तवारणे। क्लीवं प्रासादवीथीनां वरण्डे चाप्यपाश्रये।। इति विश्वः। (जयो० २४/५०) ०वंदनवार। (जयो० ३/८१) अवलम्बित- मत्तवारणतजमत्यादरतो महीपतिः । (जयो० २१/६२) बरामदा। (वीरो० ८/४) ०वन्दनमालिका (जयो० १०/८७) •वरांडा, अलिंद। ०भवन का बहिर्गत सुसज्जित भाग। मत्तवारण: (पुं०) प्रचण्डहस्ति, मत्तहीन, उन्मत्त हाथी। (जयो० ३/८१) मत्तवारणं (नपुं०) कटी हुई सुपारी। मत्तहस्ति (पुं०) मदोन्मत्त हाथी, मत्तवारण। (जयो०वृ० ३/८१) मत्तेभः (पुं०) हस्ति शावक। (जयो०८/७२) मत्यं (नपुं०) [मत्+यत्] ज्ञानाभ्यास, ज्ञान प्राप्त करने का । साधन। मत्ता (वि०) मद्रूपता, मेरे समान। (जयो० २३/७४) मत्तोऽपि (अव्य०) मुझसे भी। (सुद० ३/३८) मत्वा (सं०कृ०) [मत्+क्त्वा] ०मानकर, ०समझकर, ०ज्ञान करके। (सुद० २/४७) मत्वा प्रीत्याम्बरं वासर एष दत्त्वा (वीरो०८/२९) मत्त्व (वि०) ज्ञात्व, ज्ञायक। (जयो० ) मत्स्यः (पुं०) [मद्+सन्] मछली। मत्सर (पुं०) [म+सरन्] ०ईष्यालु, डाह करने वाला, जलने वाला। ०अतृप्त, लालची, लोभी। दरिद्र, निर्धन। दुष्ट। मत्सरः (पुं०) ईर्ष्या, डाह, जलन। मात्सर्य, कोप, खेदखिन्न मछली। (जयो० १४/७८) मीनराशि। मत्स्यकरण्डिका (स्त्री०) मछली रखने की टोकरी। मत्स्यगन्धः (वि०) मछली की गन्ध। मत्स्यगन्ध (पुं०) सरस्वती, भारती, वाणी, वाग्देवी। मत्स्यधातिन् (पुं०) मछुआरा। मत्स्यजाल (नपुं०) मछली पकड़ने का जाल। मत्स्यजीवन् (पुं०) मछुआरा। मत्स्यनाशकः (पुं०) कुरटपक्षी। मत्स्यपुराणः (पुं०) पुराण ग्रंथ का नाम। मत्स्यबन्धः (पुं०) मछुआरा। मत्स्यबन्धिन् देखो ऊपर। मत्स्यरङ्कः (पुं०) रामचिरैया, मछली खाने वाली चिड़िया। मत्स्यरङ्गक देखो ऊपर। मत्स्यरीतिः (स्त्री०) मत्स्य न्याय की पद्धति। (जयो० ३/४) मत्स्यवेधनः (पुं०) मछली पकड़ने की बंसी। मत्स्यसंघातः (पुं०) मछलियों का समूह। मथन (वि०) बिलोने वाला, मथने वाला। ___०क्षति पहुंचाने वाला, नाश करने वाला। मथनः (पुं०) [मथ्+घञ्] एक वृक्ष विशेष। मथनं (नपुं०) बिलोना, मथन। (सुद० १३६) ०घिसना, रगड़ना। ०क्षति, चोट, घात। मथनाचलः (पुं०) मंदराचल पर्वत। मथित (भू०क०कृ०) [मथ्+क्त] ०मथा गया, बिलोया गया। बिक्षुब्ध किया गया, हिलाया गया। ०कुचला गया, पीसा गया। ०कष्टग्रस्त, दुःखी, अत्याचार, पीड़ित। ०वध किया गया, नाश किया हुआ। स्थान भ्रष्ट। मथितं (नपुं०) मट्ठा, छांछ। मथिन् (पुं०) [मथ्इनि] रई का डंडा। मथुरा (स्त्री०) [मथ्+उ+ऋ+टाप्] मथुरा नगरी, यमुना नदी के दक्षिण किनारे पर स्थित नगर। मथुरानगरी (स्त्री०) मथुरापुरी। (वीरो० ११/१५) मद् -उत्तम पुरुष एकवचन सर्वनाम। मेरे लिए। (मद्विषये (सुद०८५) मद् (अक०) मदहोश होना, पागल होना, मस्त होना, नशे में धुत्त होना। होना। मत्सरिन् (वि०) [मत्सर+इनि] ०ईर्ष्यालु, डाह करने वाला। विरोधी शत्रुता रखने वाला। दुष्टात्मन्, परगुणमत्सरी। ०लालायित, लालची, स्वार्थरत। मत्सी (स्त्री०) मछली। (दयो० १४) मत्स्यः (पुं०) [मद्स्य न्] ०मीन। (जयो०१० ५/७३) For Private and Personal Use Only
SR No.020130
Book TitleBruhad Sanskrit Hindi Shabda Kosh Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorUdaychandra Jain
PublisherNew Bharatiya Book Corporation
Publication Year2006
Total Pages450
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationDictionary
File Size24 MB
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