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________________ मुहता नैणसीरी ख्यात १. अंबलीरो टूक-रावतरो। १. वळोर-रांणारी। १. वांभोतर, धमोतर रावतरी। १. हरवार, वघरेडो, वडगांव राबतरी । नै १. भैरवी रांणारी । घाटो' छ । देवळियैरा गांव-चीताखेडो, उगरावण, धमोतर चाकर रावतरा। रावतसिंघ तेजारो मूवो । पाट रावत जसवंत देवळिये हुवो। तद वसाइरो गांव मोडी रावत जसवंत नाहररो सकतावत रांणा जगतसिंघरो मेलियो' थांग रहै घणा साथसूं । रावत जसवंत सिंघावत मंदसोररो फोजदार जांनिसारखाँ थो तिणनूं भखाइ दीवांणरा थांणा . ऊपर प्रांणियो। रावत आप साथे न छै । देवळियारों साथ घणो भेळो छ । रावत जसवंत नरहरोत इतरा साथसूं काम प्रायो-- १. रावत जसवंत नरहरोत । १. सीसोदियो जगमाल वाघावत । . १. सीसोदियो पीथो वाघावत । २. सीसोदियो कान, सादूळ नरहरोत । .. ............. १. सवळसिंघ चतुरभुजोत पूरबियो। : इतरो साथ काम प्रायो। तिको गुसो मनमें राखनै रांणो जगतसिंघ उदैपुर रावत जसवंत सिंघावतनूं रामसिंघ करमसेनोत कना' रावत जसवंत नै वेटो महासिंघ मराया । न तद पैहली साह अखैराजनूं देवळियारी गड़ासंघ धीरावदरो दीवांण, परगनो छ, तठे चूक माथै घणा साथसूं राखियो थो। साहनूं लिख मेलियो थो जु थे जाय देवळि यो लेजो-मारजो। पिण साह गयो नहीं। उठे सीसोदियो जोध गोपाळोत राबत हरीसिंघनू टीकै वैसांणियो । पछै सीसोदियो . ] दो पहाडोके बीचका बड़ा मार्ग । 2 तेजाका पुत्र रावतसिंह मरगया । मजा हुआ। बहकाकर। 5 रानाके थाने पर चढाकर ले अाया। 6 सामिल है। से, द्वार। 8 जनने पहले। 9 छल द्वारा मारलेने के निमित्त । 10 गद्दी पर विका दिया।
SR No.010609
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1960
Total Pages377
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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