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वीरजी की मूर्ति वना रक्खी है परन्तु जिसने गुरुमुख से श्रुत ज्ञान नहीं पाया अर्थात् भगवान् का स्वरूप नहीं सुना उसे मूर्तिको देखके कभी ज्ञान नहीं होगा कि यह किसकी मूर्ति है जैसे अनपढ़ अक्षर कभी नहीं वाचसकता फिर तुम अक्षराकारको देखके तथा मूर्तिको देखके ज्ञान होना किस भूलसे कहते हो ज्ञान तो ज्ञान से होता है, क्योंकि अज्ञानीको तो पूर्वोक्त मूर्तिसे ज्ञान होता नहीं और ज्ञानीको मूर्तिकी गर्ज नहीं इत्यर्थः ॥
पूर्वपक्षी - यदि ज्ञानसे ज्ञान होता है तो फिर तुम पोथीयें क्यों वाचते हो !
उत्तरपक्षी - ओहो तुम्हें इतनी भी खबर नहीं
कि हम पोथीयें क्यों वाचते हैं भला मैं बता
देती हूं अपनी भूलके प्रयोगसे क्योंकि पहिले
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