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( ११ )
अतीतकाल में इन्द्रपनका कार्य साधक था रन्तु वर्तमान में कार्य साधक नहीं यथा इदं घृतकुम्भम् अर्थात् कुम्भमेंसे घृत तो निकाल लिया फिर भी उसे घृत कुम्भही कहते हैं परन्तु उससे घी की प्राप्ति नहीं । इत्यर्थः ३ ४ भाव निक्षेप, जो पूर्वोक्त इन्द्र पदवी सहित वर्तमानकालमें इन्द्रपनके सकल कार्यका साधक इत्यादिक ॥ ४
अथ पदार्थका नाम १ और नाम निक्षेप २ स्थापना ३ और स्थापना निक्षेप ४ द्रव्य ५ और द्रव्य निक्षेप ६ भाव ७ और भाव निक्षेप ८ इन का न्यारा २ स्वरूप दृष्टान्त सहित लिखते हैं ||
(१) नाम, यथा एक, द्रव्य, मिशरी नाम है अर्थात् वह जो मिशरी नाम है सो सार्थक