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________________ ४६० कसाय पाहुड सुत्त [५ संक्रम-अर्थाधिकार हियाणि । ६७९. लोहे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८०. पञ्चक्खाणमाणे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८१. कोहे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८२. मायाए पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८३. लोहे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८४. मिच्छत्ते पदेससंकमहाणाणि असंखेज्जगुणाणि । ६८५. हस्से पदेससंकमट्ठाणाणि असंखेज्जगुणाणि । ६८६. रदीए पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६८७. इत्थिवेदे पदेससंकमट्ठाणाणि संखेज्जगुणाणि । ६८८. सोगे पदेससंकमाणाणि विसेसाहियाणि । ६८९. अरदीए पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९०. णसयवेदे पदेससंकमठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९१. दुगुंछाए पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९२. भए पदेससंकमाणाणि विसेसाहियाणि । ६९३. पुरिसवेदे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । - ६९४. माणसंजलणे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९५. कोहसंजलणे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९६. मायासंजलणे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९७. लोहसंजलणे पदेससंकमट्ठाणाणि विसेसाहियाणि । ६९८. सम्मत्ते पदेससंकमट्ठाणाणि अणंतगुणाणि । ६९९. सम्मामिच्छत्ते पदेससंकमट्ठाणाणि ख्यानमायासे अप्रत्याख्यानलोभमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक है। अप्रत्याख्यानलोभसे प्रत्याख्यानमानमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक है। प्रत्याख्यानमानसे प्रत्याख्यानक्रोधर्म प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक है। प्रत्याख्यानक्रोधसे प्रत्याख्यानमायामे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेप अधिक हैं। प्रत्याख्यानमायासे प्रत्याख्यानलोभमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं ॥६७६-६८३॥ चूर्णिसू०--प्रत्याख्यानलोभसे मिथ्यात्वमे प्रदेशसंक्रमस्थान असंख्यातगुणित हैं । मिथ्यात्वसे हास्यमे प्रदेशसंक्रमस्थान असंख्यातगुणित हैं। हास्यसे रतिमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेप अधिक हैं। रतिसे स्त्रीवेदमे प्रदेशसंक्रमस्थान संख्यातगुणित है। स्त्रीवेदसे शोकमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिफ हैं। शोकसे अरतिमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं । ... अरतिसे नपुंसकवेदमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक है। नपुंसकवेदसे जुगुप्सामे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। जुगुप्सासे भयमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं । भयसे पुरुपयेदमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं ॥६८४-६९३॥ चूर्णिसू०-पुरुपवेदसे संज्वलनमानमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं । संज्वलनमानसे संज्वलनक्रोधमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। संज्वलनक्रोधसे संज्वलनमायामें प्रदेशसंक्रमस्थान विशेप अधिक हैं। संज्वलनमायासे संज्वलनलोभमे प्रदेशसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं । संज्वलनलोभसे सम्यक्त्वप्रकृतिमे प्रदेशसंक्रमस्थान अनन्तगुणित हैं । सम्यक्त्व १ कुदो, उबेल्लणचरिमफालीए सत्वसकमेणाणंतसकमाणसभवाविससे वि दवबिसेसमरिसऊण तहाभावोववत्तीदो। जयघ०
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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