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________________ कसाय पाहुड सुत्त [५ संक्रम-अर्थाधिकार ___ ३८४. सम्मत्तस्स भुजगारसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि १ ३८५. जहण्णेण पलिदोवमस्सासंखेज्जदिभागो। ३८६. उक्कस्सेण उवड्डपोग्गलपरियहूं। ३८७. अप्पदरावत्तव्यसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि १ ३८८. जहण्णेण अंतोमुहुत्तं । ३८९. उकस्सेण उबड्डपोग्गलपरियट्ट । ३९०. सम्मामिच्छत्तस्स भुजगार-अप्पयरसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ३९१. जहण्णेण एयसमओ । ३९२. उक्स्से ण उघडपोग्गलपरियट्ट । ३९३. अवत्तव्यसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ३९४. जहण्णेण अंतोमुहुत्तं । ३९५. उक्कस्सेण उबड्डपोग्गलपरियट्ट। ३९६. अणंताणुवंधीणं भुजगार-अप्पयरसंकामयंतरं केवचिरं कालादो होदि ? शंका-सम्यक्त्वप्रकृतिके भुजाकार-संक्रामकका अन्तरकाल कितना है ? ॥३८४॥ समाधान-जघन्य अन्तरकाल पल्योपमके असंख्यातवें भाग है और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपार्धपुद्गलपरिवर्तन है ॥३८५-३८६॥ शंका-सम्यक्त्वप्रकृतिके अल्पतर और अवक्तव्यसंक्रामकोका अन्तरकाल कितना है ? ॥३८७॥ समाधान-जघन्य अन्तरकाल अन्तर्मुहूर्त और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपाधपुद्गलपरिवर्तन है ॥३८८-३८९॥ शंका-सम्यग्मिथ्यात्वके भुजाकार और अल्पतरसंक्रामकोका अन्तरकाल कितना है ? ॥३९०॥ समाधान-जघन्य अन्तरकाल एक समय और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपाधपुद्गलपरिवर्तन है ॥३९१-३९२।। शंका-सम्यग्मिथ्यात्वके अवक्तव्यसंक्रामकका अन्तरकाल कितना है ? ॥३९३।। समाधान-जघन्य अन्तरकाल अन्तर्मुहूर्त और उत्कृष्ट अन्तरकाल उपार्धपुगलपरिवर्तन है ।।३९४-३९५।। शंका-अनन्तानुबन्धी कपायोके भुजाकार और अल्पतर संक्रामकोका अन्तरकाल कितना है ? ॥३९६॥ १ त जहा चरिमुवेल्लणकडयम्मि गुणसकमेण पयदसकमस्सादि करिय तदणतरसमए सम्मत्तमुप्पाइय असकामगो होदृणतरिय सबलहु मिच्छत्तं गंतॄण सम्बजहण्णुव्वेलणकालेणुव्वेल्लमाणयत्स चरिमट्ठिदि खडए पटमसमए लद्धमंतरं होइ । जयध० २ कथं ? अणादियमिच्छाइट्ठी सम्मत्तमुप्पाइय सव्वलहं मिच्छत गतृण जहण्णुब्बेल्लणकालणुप्प हलमाणो चरिमछिदिखंडम्मि भुजगारसंकमत्सादि कादूणतरिय देसूणद्धपोग्गलपरियट्ट परिभामय पुणा पलिदोवमासंखेजभागमेत्ततेसे सिल्झणकाले सम्मत्तं घेत्तण मिच्छत्तपडिवादेणुव्वेल्लेमाणयस चरिमे दिदि ग्वंडए लद्धमतर कायव्व । एवमादिल्लंतिल्लेहि पलिटोवमत्स असखेनदिमागतोमुहुत्तेहि परिहीणद्धपोग्गल. परियट्टमेत पयदुकत्संतरपमाण होदि । जयध०
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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