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________________ ४३१ गा० ५८] प्रदेशसंक्रम-भुजाकार-काल-निरूपण केवचिरं कालादो होदि १ ३३९. जहण्णुक्कस्सेण एयसमओ' । ३४०. वारसकसाय-पुरिसवेद-भय-दुगुंछाणं भुजगार-अप्पदर-संकमो केवचिरं कालादो होदि ? ३४१. जहण्णेणेयसमओ । ३४२. उकस्सेण पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो। ३४३. अवढिदसंकमो केवचिरं कालादो होदि १ ३४४.जहण्णेण एयसमओ। ३४५. उकस्सेण संखेज्जा समया । ३४६ अवत्तव्यसंकमो केवचिरं कालादो होदि ? ३४७. जहण्णुकस्सेण एयसमओ। ३४८. इत्थिवेदस्स भुजगारसंकमो केवचिरं कालादो होदि १ ३४९. जहण्णेण एयसमओ । ३५०. उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं । ३५१. अप्पयरसंकमो केवचिरं कालादो होदि ? ३५२. जहण्णेण एगसमओ । ३५३. उक्कस्सेण वे छावहिसागरोवमाणि शंका-अनन्तानुबन्धी कपायोके अवक्तव्यसंक्रमणका कितना काल है ? ॥३३८॥ समाधान-जघन्य और उत्कृष्ट काल एक समयमात्र है ॥३३९॥ शंका-अप्रत्याख्यानावरणादि वारह कषाय, पुरुपवेद, भय और जुगुप्सा, इतनी प्रकृतियोंके भुजाकार और अल्पतर संक्रमणका कितना काल है १ ॥३४०॥ समाधान-उक्त प्रकृतियोका जघन्यकाल एक समय और उत्कृष्टकाल पल्योपमके असंख्यातवे भागप्रमाण है ॥३४१-३४२॥ शंका-उक्त प्रकृतियोके अवस्थितसंक्रमणका कितना काल है ? ॥३४३॥ समाधान-जघन्यकाल एक समय और उत्कृष्टकाल संख्यात समय है ॥३४४-३४५॥ शंका-उन्ही प्रकृतियोके अवक्तव्यसंक्रमणका कितना काल है १ ॥३४६॥ समाधान-उक्त प्रकृतियोके अवक्तव्यसंक्रमणका जघन्य और उत्कृष्ट काल एक समयमात्र है ॥३४७॥ शंका-स्त्रीवेदके भुजाकारसंक्रमणका कितना काल है ? ॥३४८।। समाधान-जघन्यकाल एक समय और उत्कृष्टकाल अन्तर्मुहूर्त है ॥३४९-३५०॥ शंका-स्त्रीवेदके अल्पतरसंक्रमणका कितना काल है १ ॥३५१॥ समाधान-जघन्य काल एक समय और उत्कृष्ट काल संख्यात वर्ष अधिक दो वार छयासठ सागरोपम है ॥३५२-३५३।। १ विसजोयणापुव्वसजोगणवकबधावलिवदिक्कतपढमसमए तदुवलभादो । जयध० २ एइदिएहिंतो पचिदिएसु पचिदिएहिंतो वा एइदिएसुप्पण्णस्स जहाकम तदुभयकाल्स्स तप्पमाणत्तसिद्धीए विरोहाभावादो । जयध० ३ सव्वोवसामणापडिवादपढमसमयादो | जयध० ४ त कथ ? अण्णवेदबधादो एयसमयमिस्थिवेदबध कादूण तदण तरसमए पुण्णो वि पडिवक्खवेदबधमाढविय वधावलियवदिफतसमए कमेण सकामेमाणयस्स एयसमयमेत्तो इथिवेदत्स भुजगारसकमकालो जहण्णकालो होइ । जयध०
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
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