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गा० ५८]
स्थितिसंक्रम-अल्पवहुत्व-निरूपण १३६. सम्मामिच्छत्तस्स जहण्णहिदिसंकमो असंखेज्जगुणो'। १३७. पुरिसवेदस्स जहण्णट्ठिदिसंकमो असंखेज्जगुणो । १३८.इत्थिवेदस्स जहण्णढिदिसंकयो विसेसाहिओ। १३९. हस्स-रईणं जहण्णढिदिसंकमो विसेसाहिओ । १४०. णqसयवेदस्स जहण्णहिदिसंकमो विसेसाहिओ। १४१. अरइ-सोगाणं जहण्णहिदिसंकमो विसेसाहिओ । १४२. भय-दुगुंछाणं जहण्णहिदिसंक्रमो विसेसाहिओ। १४३. बारसकसायाणं जहणहिदिसंकमो विसेसाहिओ । १४४. मिच्छत्तस्स जहण्णढिदिसंकमो विसेसाहिओ।
___१४५. विदियाए सव्वत्थोवो अणंताणुबंधीणं जहण्णहि दिसंको । १४६. सम्मत्तस्स जहण्णहिदिसंकमो असंखेजगुणों । १४७.सम्मामिच्छत्तस्स जहण्णढिदिसंकमो विसेसाहिओं । १४८.वारसकसाय-णवणोकसायाणं जहण्णडिदिसंकमो तुल्लो असंखेज्जसे अनन्तानुवन्धीकषायका जघन्य स्थितिसंक्रमण असंख्यातगुणित है । अनन्तानुवन्धी कपायके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे सम्यग्मिथ्यात्वका जघन्य स्थितिसंक्रमण असंख्यातगुणित है । सम्यग्मिथ्यात्वके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे पुरुषवेदका जघन्य स्थितिसंक्रमण असंख्यातगुणित है। पुरुपवेदके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे स्त्रीवेदका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है। स्त्रीवेदके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे हास्य और रतिका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेप अधिक है। हास्य-रतिके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे नपुंसकवेदका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है। नपुंसकवेदके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे अरति और शोकका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है। अरति-शोकके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे भय-जुगुप्साका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है। भय-जुगुप्साके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे बारह कषायोका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है । वारह कपायोके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे मिथ्यात्वका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है ॥१३३-१४४॥
चूर्णिसू०-दूसरी पृथिवीमें अनन्तानुबन्धीका जघन्य स्थितिसंक्रमण सबसे कम है। अनन्तानुबन्धीके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे सम्यक्त्वप्रकृतिका जघन्य स्थितिसंक्रमण असंख्यातगुणित है । सम्यक्त्वप्रकृतिके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे सम्यग्मिथ्यात्वका जघन्य स्थितिसंक्रमण विशेष अधिक है। सम्यग्मिथ्यात्वके जघन्य स्थितिसंक्रमणसे वारह कपाय और नव नोक
१ उव्वेल्लणाचरिमफालीए जहण्णभावोवलद्धीदो एत्यतणी पलिदोवमासखभागायामा चरिमफाली अणताणुबधीविसजोयणाचरिमफालीआयामादो असखेजगुणा, तत्थ करणपरिणामेहि घादिदावसेस्स एत्तो थोवत्तसिद्धीए गाइयत्तादो | जयध०
२ हदसमुप्पत्तिकम्मियासणिपच्छायदणेरइयम्मि अतोमुहुत्ततम्भवत्यम्मि पलिदोवमासखेज्जभागेणूणसागरोवमसहस्सचदुसत्तभागमेत्तपुरिसवेदजहण्णछिदिसकमावलबणादो । जयध० ३ तत्य विसजोयणाचरिमफालीए करणपरिणामेहि लद्ध घादावसेसिदाए सम्वत्थोवत्ताविरोहादो।
जयघ० ४ उज्वेल्लणचरिमफालीए लद्धजहण्णभावत्तादो। जयध०
५ कारण-पढमदाए उव्वेल्ल्माणो मिच्छाइट्ठी सम्वत्य सम्मामिच्छत्तुवेल्लणकडयादो सम्मत्तस्स विसेसाहियमेव ठिदिखंडयघाद करेइ जाव सम्मत्तमुवेल्लिद ति | पुणो सम्मामिच्छत्तमुवेल्लेमाणो सम्मत्त