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गाथा २६] प्रकृतिसंकामक-अल्पबहुत्व-निरूपण
२५९ ___९२. अप्पाबहुअं । ९३. सव्वत्थोवा सम्मत्तस्स संकामया । ९४. मिच्छत्तस्स संकामया असंखेजगुणा । ९५. सम्मामिच्छत्तस्स संकायया विसेसाहिया । ९६. अणंताणुबंधीणं संकामया अणंतगुणा । ९७. अट्ठकसायाणं संकायया विसेसाहिया,। ९८ लोभसंजलणस्स संकामया विसेसाहिया । ९९. णवूसयवेदस्स संकामया विसेसाहिया। १००. इत्थिवेदस्स संकामया विसेसाहिया । १०१. छण्णोकसायाणं संकामया विसेसाहिया । १०२ पुरिसवेदस्स संकामया विसेसाहिया । १०३. कोहसंजलणस्स संकामया विसेसाहिया । १०४. माणसंजलणस्स संकामया विसेसाहिया । १०५. मायासंजलणस्स संकामया विसेसाहिया ।
१०६. णिरयगदीए सव्वत्थोवा सम्मत्तसंकामया । १०७. मिच्छत्तस्स संकामया असंखेजगुणा । १०८. सम्मामिच्छत्तस्स संकामया विसेसाहिया । १०९. अणंताणुबंधीणं संकामया असंखेज्जगुणा। ११०. सेसाणं कम्माणं संकामया तुल्ला विसेसाहिया । १११. एवं देवगदीए ।
११२. तिरिक्खगईए सव्वत्थोवा सम्मत्तस्स संकामया । ११३. मिच्छत्तस्स
चर्णिमु०-अव प्रकृति-संक्रामकोका अल्पबहुत्व कहते है-सम्यक्त्वप्रकृतिके संक्रामक जीव वक्ष्यमाण पदोकी अपेक्षा सबसे कम है। सम्यक्त्वप्रकृतिके संक्रामकोसे मिथ्यात्वके संक्रामक असंख्यातगुणित हैं। मिथ्यात्वके संक्रामकोसे सम्यग्मिथ्यात्वसे संक्रामक विशेष अधिक हैं । सम्यग्मिथ्यात्वके संक्रामकोसे अनन्तानुवन्धी कपायोके संक्रामक अनन्तगुणित हैं । अनन्तानुबन्धी कपायोके संक्रामकोसे आठ मध्यम कपायोके संक्रामक विशेष अधिक है। आठ मध्यम कपायोके संक्रामकोसे संज्वलनलोभके संक्रामक विशेप अधिक है। संज्वलनलोभके संक्रामकोसे नपुंसकवेदके संक्रामक विशेष अधिक है। नपुंसकवेदके संक्रामकोंसे स्त्रीवेदके संक्रामक विशेप अधिक है। स्त्रीवेदके संक्रामकोसे हास्यादि छह नोकपायोंके संकामक विशेष अधिक है। हास्यादि छह नोकपायोके संक्रामकोसे पुरुषवेदके संक्रामक विशेप अधिक है। पुरुपवेदके संक्रामकोसे संज्वलनक्रोधके संक्रामक विशेष अधिक है। संज्वलनक्रोधके संक्रामकोसे संज्वलनमानके संक्रामक विशेष अधिक है। संज्वलनमानके संक्रामकोसे संज्वलनमायाके संक्रामक विशेप अधिक है ॥९२-१०५।।
चूर्णिसू०-नरकगतिमे सम्यक्त्वप्रकृतिके संक्रामक जीव सबके कम हैं। सम्यक्त्वप्रकृतिके संक्रामकोसे मिथ्यात्वके संक्रामक असंख्यातगुणित है। मिथ्यात्वके संक्रामकोसे सम्यग्मिथ्यात्वके संक्रामक विशेष अधिक है। सम्यग्मिथ्यात्वके संक्रामकोसे अनन्तानुवन्धीकपायोके संक्रामक असंख्यातगुणित है। अनन्तानुबन्धीकषायोके संक्रामकोसे शेप मोहनीयप्रकृतियोके संक्रामक परस्पर तुल्य और विशेप अधिक है। देवगतिमे संक्रामक-सम्बन्धी अल्पबहुत्व नरकगतिके समान जानना चाहिए ॥१०६-१११॥
चूर्णिसू०-तिर्यंचगतिमे सम्यक्त्वप्रकृतिके संक्रामक सबसे कम है । सम्यक्त्वप्रकृतिके