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स्थितिक अल्पबहुत्व-निरूपण
तदों 'डिदियं' ति पदस्स विहासा समत्ता ।
एत्थेव 'पयडीय मोहणिज्जा' एदिस्से मूलगाहाए अत्थो समत्तो । ठिदियं ति अहियारो समत्तो तदो पदेसविहत्ती सचूलिया समत्ता
अति और शोकप्रकृतियोके अग्रस्थितिक आदि चारो प्रकार के प्रदेशाग्रोका अल्पबहुत्व जानना चाहिए ।। १०२-१०६॥
इस प्रकार चौथी मूलगाथा के 'ठिदियं वा' इस पदी विभाप समाप्त हुई । इसके साथ ही यहीं पर 'पयडीय मोहणिज्जा' इस मूलगाथाका अर्थ समाप्त हुआ । स्थितिक अधिकार समाप्त हुआ ।
इस प्रकार चूलिका सहित प्रदेशविभक्ति समाप्त हुई ।
गा० २२ ]
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