SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 310
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २०४ कसाय पाहुड सुत्त [५ प्रदेशविभक्ति उक्कस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । १६७. भए उकस्सपदेसमंतकम्मं विसेसाहियं । १६८. पुरिसवेदे उक्कस्सपदेससंतकम्यं विसे साहियं । १६९. माणसं जलणे उक्कस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । १७०. कोधसंजलणे उक्कस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । १७१. मायासंजलणे उक्कस्सपदेससंतसम्म विसेसाहियं । १७२. लोभसंजलणे उक्कस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । १७३. एवं सेसाणं गदीणं णादूण णेदव्यं । १७४. एई दिएसु सव्यत्थोवं सम्मत्ते उकस्सपदेससंतकम्मं । १७५. सम्मामिच्छत्ते उकस्सपदेससंतकम्ममसंखेजगुणं । १७६. अपञ्चक्खाणमाणे उक्कस्तपदेससंतकम्मपसंखेजगुणं । १७७. कोहे उकस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । १७८. मायाए उकस्सपदेससंतसम्मं विसेसाहियं । १७९. लोभे उकस्सपदेससंतकम्म विसेसाहियं । १८०. पच्चस्खाणमाणे उस्कस्सपदेससंतकस्मं विसेसाहियं । १८१. कोहे उक्कस्सपदेससंतकम्यं विसेसाहियं । १८२. मायाए उक्कस्सपदेससंतकम्मं विसेसाहियं । अधिक है । जुगुप्साप्रकृतिके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे भयप्रकृतिम उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । भयप्रकृतिके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे पुरुषवेदमे उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे विशेष अधिक है ।।१५८-१६८॥ चूर्णिमू०-पुरुपवेदके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे संज्वलनमानमे उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेप अधिक है ।- संज्वलनमानके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे संज्वलनक्रोधमे उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । संज्वलनक्रोधके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे संचलनमायाम उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। संज्वलनमायाके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्ममे संज्वलनलोभमे उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । इसी प्रकारसे शेषगतियों का अल्पबहुत्व जान करके लगाना चाहिए ।। १६९-१७३।। चूर्णिम् ०-एकेन्द्रियोमे सम्यक्त्वप्रकृतिमे उत्कृष्ट प्रदशसत्कर्म वक्ष्यमाण पदोकी अपेक्षा सबसे कम है । सम्यक्त्वप्रकृतिके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे सम्यग्मिथ्यात्वप्रकृतिमे उत्कृष्ट प्रदेशसन्कर्म असंख्यातगुणा है । सम्यग्मिथ्यात्वप्रकृतिके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म मे अप्रत्याख्यानावरणमानकपायमें उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म असंख्यातगुणा है । अप्रन्याख्यानावरण-मानकपायके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे अप्रत्याख्यानावरण-क्रोधकपायमै उत्कृष्टप्रदंशयकर्म विशेष अधिक है । अप्रत्याख्यानावरण-क्रोधकपायके उत्कृष्टप्रदेशसत्कर्मसे अप्रत्याख्यानावरण-मायाकपायमै उत्कृष्टप्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। अप्रत्याख्यानावरण-मायाकपायके उत्कृष्टप्रदेशमकर्ममे अप्रत्याख्यावरण लोभकयायमे उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है ॥१७४-१७९॥ चूर्णिसू ०-अप्रत्याख्यानावरण-लोभकपायक उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण मानकयायमें उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है। प्रत्याख्यानावरण-मानकमायके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण-क्रोचकपायमै उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्म विशेष अधिक है । प्रत्याख्यानावरण काधकपायके उत्कृष्ट प्रदेशसत्कर्मसे प्रत्याख्यानावरण-मायाकपायमै उत्कृष्ट प्रदेशमन्कर्ग विशेष
SR No.010396
Book TitleKasaya Pahuda Sutta
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherVeer Shasan Sangh Calcutta
Publication Year1955
Total Pages1043
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size71 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy