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कसाय पाहुड सुत्त
५६४ २५,२६ निगोदिया
२८,२६ ५६५ १५ है । उसी
है। उसी वादर एकेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्त जीवके माया का उत्कृष्ट काल उसीके उत्कृष्ट क्रोधकालसे विशेष
अधिक है । उसी ५७० ६-१० किन्तु पुन लौटकर क्रोधकषायसे किन्तु पुत्र. लौटकर क्रोधकषायसे उपयुक्त रहकर उपयुक्त होगा।
तत्पश्चात् मानको उल्लघन करके लोभको प्रास होगा ६१८ ७ बंधसे पहले ही
उपशमसे पहले ही बन्धसे ६३८ १७ परिणामो होना
परिणामोका होना ६६२ ४ अणुभागखेडयं
अणुभागखंडयं ६७० २२ अनिवृत्तिकरण
अपूर्वकरण ६८७ ६ तिण्हं पि कम्माणं णस्थि वियप्पो तिएहं पि कम्माणं ठिदिवधस्स वेदणीयस्स हिदि
वंधादो ओसरंतस्स णस्थि वियप्पो ६६० २७ लोभका सक्रमण
लोभका असक्रमण ७२६ ६ चडमाणस्स
माणस्स ८२२ १२ देव या नरकगतिसे आकर तिर्यंच या नित्यनिगोदसे निकलकर मनुष्यमें उत्पन्न होकर
मनुष्योमें ही कर्मस्थिति प्रमाण काल
तक रहकर ८३८ ३ ६६४ ८६१ २६ माया
मान
ताडपत्रीय प्रतिसे संशोधित पाठ पृष्ठ पंक्ति मुद्रित पाठ
ताडपत्रीय प्रतिपाठ ५१ ५ एदेसु परिणयोगद्दारेसु तदो
एवं ३३७ ५ अंतोमुहुत्तं सकामेमाणो
सकमाणो ६२८ ४ असखेज्जगुणहीण पदेसग्ग
असंखेज्जगुणहीण ६३० ११ अभिजोग्ग-अरणभिजोग्गे
अभिजोग्गमणभिजोग्गे ६४६ ४ तदो
तम्हि ६५० ५ संखेज्जभागिगं
संखेज्जदिभागिगं ६५२ ६ ताव जाव
ताव असखेज्जगुरण जाव ६६१ १ जहण्णय ठिदिखंडय
ठिदिखंडय जहण्णय ६६६ ६ पडिवज्जमाणस्स
पडिवज्जमाणगस्स ६७१ १२ अरणवड्ढिदेण
अणुवडिढदेण ६८६ ८ असखेज्जगुणादो
असखेज्जादो ७२४ ४ कम्मारण
कम्मपयडीग