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________________ पाटणमा श्री हेमचन्द्राचार्य जेन ज्ञानमदिरस्थित कागळ उपरना हस्तलिखित (Paper MN)२००३५ ग्रथोनो अकारादिक्रम पुस्तकनु नाम पत्र भाषा कर्ता क्रमाक पुस्तकनु नाम पत्र भाषा कर्ता क्रमाक ६४३ (१) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १-३ पा मू वीरभद्रगणि ६४४ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ४-५ पा वीरभद्रगणि ६६४ (१) आतुरप्रत्याख्यान प्रकीर्णक १-४ पा वीरभद्रगणि ६६६ (२) आतुरप्रत्याख्यान पकीर्णक ४-८ वीरभद्रगणि ७७७ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ३ प्रा ८३९ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ९०२ (६) आतुरप्रत्याख्यान प्रकीर्णक १०५-१०८ प्रा १०२६ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक २-३ प्रा १०५२ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ३-५ प्रा २५९६ (३) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक २५-२६ प्रा ३७९४ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक २-३ प्रा वीरभद्रगणि ३७९७ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक २-४ प्रा वीरभद्रगणि ४२७८ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ३-५ प्रा वीरभद्रगणि ७३०७ (८)आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ६-८ प्रा वीरभद्रगणि ७५८२ (१) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १-४ प्रा १ वीरभद्रगणि १००८५ (१) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १-२ प्रा वीरभद्रगणि १०१४० (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १०५१३ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ७ प्रा वीरभद्रगणि १०५१४ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ४ प्रा वीरभद्रगणि १०५२० (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १६ प्रा १०५५४ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ४ प्रा वीरभद्रगणि १०५५५ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ३ प्रा वीरभद्रगणि १०८४८ (१) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ४ प्रा ११०९२ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक ___११ प्रा १९२३७ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक १६९८२ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक अव ९ स गुणरत्नसूरि १००८५ (२) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक अवचूरि २-१० स भुवनतुङ्गसूरि ८१३७ आतुरपत्याख्यानप्रकीर्णकगत त्रिषष्टिध्यानकथानकसङ्ग्रह १ स ७५७३ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक टिप्पणीसहित १ प्रा वीरभद्रगणि १०५१५ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक मू वीरभद्रगणि, बालावबोधवार्तिकसह १५ पागु बा पार्श्वचन्द्रीय समरचन्द्रसूरि ६४२ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक सक्षिप्त बालावबोधसहित पञ्चपाठ ११ प्रागु मू वीरभद्रगणि ६४१ आतुरप्रत्याख्यानपकीर्णक सस्तबक ५ पागु मू वीरभद्रगणि १४६५९ आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक सस्तबक ८ प्रागु मू वीरभद्रगणि ६४५ (१) आतुरप्रत्याख्यानप्रकीर्णक सार्थ पञ्चपाठ २-४ प्रागु मू वीरभद्रगणि ६४० आतुरप्रत्याख्यानपकीर्णक सावचूरि पञ्चपाठ ५ प्रास मू वीरभद्रगणि ७०६६ (२) आतुरपत्याख्यानप्रकीर्णकावचूरि १२ गु गुणरलसूरि ९४९५ (२) आतुरप्रत्याख्यान सावचूरिक पञ्चपाठ १८ प्रास ५६३४ आत्मकुलक सस्तबक ८ प्रागु मू जयशेखरसूरि ९१२२ (१) आत्मगीत १ गु १ भुवनकीर्ति ११३८३ आत्मगीता ६ गु देवचन्द्र ५६७० (७५)आत्मजीवस्वाध्याय ६९मु गु लावण्यसमय १११५३ (२६)आत्मतत्त्वचिन्ताभावनाचूलिका ३६ स रत्नसिहसूरि १६९८९ (२) आत्मनिदाष्टक २ स
SR No.010180
Book TitleCatalogue of Manuscripts of Patana Jain Bhandara 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyavijay, Jambuvijay
PublisherShardaben Chimanbhai Educational Research Centre
Publication Year1991
Total Pages561
LanguageHindi
ClassificationCatalogue
File Size28 MB
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