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स्मृति ज्ञान कहा गया है । और अनुभव के विषय में कहा गया है कि जो ज्ञान स्मृति से भिन्न होता है वह अनुभवजन्य होता है। अनुभवजन्य ज्ञान दो प्रकार का होता है२. अयथार्थ अनुभव |
१. यथार्थ अनुभव
यथार्थ अनुभव को ही 'प्रमा' कहा गया है- 'यथार्थानुभवः प्रमा।' तर्क-संग्रह में कहा गया है।
तद्भवति तत्प्रकार कोऽनुभवो यथार्थः ।' किसी वस्तु का जो वास्तव में वह नहीं है उससे भिन्न ज्ञान अयथार्थ अनुभव है ।
तद्भवति तत्प्रकारकश्चायथार्थः । अयथार्थ अनुभव भी तीन प्रकार की होती हैसंशय, विपर्यय, तर्क। 'अनुभूतिश्चतुर्विधेति' अर्थात् अनुभूति चार प्रकार की है- १. प्रत्यक्ष, २. अनुमान, ३. उपमान, ४. शब्द ।
स्मृति
यथार्थ अनुभव (प्रमा)
प्रत्यक्ष प्रमिति अनुमिति उपमिति
" तर्कसंग्रह - पृष्ठ ५८
ज्ञान
शाब्दबोधात्मक
प्रत्यक्ष प्रमाण अनुमान उपमान प्रमाण शब्दप्रमाण
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संशय
अनुभव
अयथार्थ अनुभव (अप्रमा)
विपर्यय
तर्क